नई दिल्ली। अगर आपके वाहन का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस समाप्त हो गया है तो उसे समय रहते रिन्यू करा लेना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने बिना वैध बीमा वाले वाहनों पर शिकंजा कसने के लिए पेट्रोल पंपों पर ईंधन की आपूर्ति को वाहन के वैध बीमा से जोड़ने वाला पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, यह व्यवस्था फिलहाल देशभर के पेट्रोल पंपों पर लागू नहीं हुई है।
4 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र सरकार, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को ऐसे पायलट प्रोजेक्ट पर काम करने को कहा, जिसमें पेट्रोल पंप पर वाहन को ईंधन देने से पहले उसके बीमा की वैधता की जांच की जा सके। प्रस्तावित व्यवस्था में वैध थर्ड-पार्टी बीमा नहीं होने पर वाहन को ईंधन देने से रोका जा सकता है।
प्रस्तावित व्यवस्था में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन यानी ANPR तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। वाहन की नंबर प्लेट को स्कैन कर उसे बीमा संबंधी डेटाबेस से मिलाया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बीमा की स्थिति का मिलान वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर किया जा सकता है। इसके लिए वाहन संबंधी VAHAN और बीमा संबंधी डेटाबेस को जोड़ने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में देश में बड़ी संख्या में बिना बीमा चल रहे वाहनों को लेकर चिंता जताई थी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 30.48 करोड़ पंजीकृत वाहनों में से लगभग 16.54 करोड़ वाहनों के पास वैध बीमा नहीं था, यानी करीब 56 प्रतिशत वाहन बीमा कवरेज से बाहर थे।
इससे जुड़ा एक और महत्वपूर्ण बदलाव नई गाड़ियों के थर्ड-पार्टी बीमा को लेकर किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार नई कारों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा की अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर चार वर्ष और नए दोपहिया वाहनों के लिए पांच वर्ष से बढ़ाकर छह वर्ष की गई है। IRDAI को इसके संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा गया है।
प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य वाहन मालिकों को अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा बनाए रखने के लिए प्रेरित करना है। बिना बीमा वाहन से दुर्घटना होने की स्थिति में पीड़ितों के मुआवजे से जुड़े मामलों में भी परेशानी सामने आती है। ऐसे में बीमा कवरेज बढ़ाने और उसके अनुपालन को बेहतर बनाने के लिए तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
बीमा क्षेत्र पर भी इसका असर पड़ सकता है। 17 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश की पांच बड़ी मोटर बीमा कंपनियों ने संयुक्त रूप से करीब 48,400 करोड़ रुपये का मोटर प्रीमियम लिखा था, जो मोटर बीमा खंड का लगभग 45 प्रतिशत था। हालांकि, प्रस्तावित व्यवस्था से प्रीमियम कारोबार में वास्तविक कितना बदलाव आएगा, यह पायलट प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन और बीमा कवरेज बढ़ने पर निर्भर करेगा।
फिलहाल वाहन मालिकों के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ व्यवस्था को अभी पूरे देश में लागू नियम न समझें। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इसका पायलट मॉडल तैयार किया जा रहा है। वहीं वैध थर्ड-पार्टी बीमा रखना पहले से ही मोटर वाहन कानून के तहत अनिवार्य है।








