लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी में संगठन और नेतृत्व को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पार्टी प्रमुख मायावती ने हाल में स्पष्ट किया है कि उनके भतीजे आकाश आनंद और ईशान आनंद को संगठन में कोई पद नहीं दिया जाएगा। इसके बाद पार्टी के उन वरिष्ठ नेताओं की भूमिका चर्चा में आ गई है, जो लंबे समय से संगठनात्मक और राजनीतिक मामलों में मायावती के साथ काम करते रहे हैं।
20 सितंबर को प्रकाशित इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मायावती की कोर टीम में उनके छोटे भाई आनंद कुमार के अलावा राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा, मेवालाल गौतम, अरविंद कुमार गौतम, कोषाध्यक्ष श्रीधर, राज्यसभा सदस्य रामजी गौतम, उत्तर प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल और राष्ट्रीय सचिव नौशाद अली शामिल प्रमुख चेहरे हैं। रिपोर्ट में इन्हें पार्टी संगठन के संचालन में मायावती के साथ काम करने वाले प्रमुख सहयोगियों के रूप में बताया गया है।
आनंद कुमार मायावती के छोटे भाई और आकाश व ईशान के पिता हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें लखनऊ और दिल्ली में होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय बैठकों में भाग लेने के साथ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर अन्य राज्यों में संगठनात्मक बैठकों और प्रगति की रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का प्रभार मायावती ने अपने पास रखा है।
सतीश चंद्र मिश्रा बसपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं और लंबे समय से मायावती के साथ संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। वह वरिष्ठ अधिवक्ता और तीन बार राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। हाल में उन्हें चुनाव आयोग से जुड़े मामलों के साथ कानूनी और मीडिया संबंधी जिम्मेदारियां भी दी गई हैं। पार्टी के सामाजिक समीकरण से जुड़े कार्यक्रमों में भी उनकी भूमिका रही है।
मेवालाल गौतम राष्ट्रीय महासचिव हैं। उनकी जिम्मेदारियों में पार्टी के फैसलों को कार्यकर्ताओं तक पहुंचाना और संगठनात्मक कार्यक्रमों का समन्वय करना शामिल बताया गया है। पिछड़ा वर्ग भाईचारा समितियों की बैठकों के संचालन की जिम्मेदारी भी उन्हें दी गई है। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 84 सीटों पर पार्टी के प्रचार की निगरानी का दायित्व दिया गया था।
अरविंद कुमार गौतम दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय से संगठनात्मक गतिविधियों में भूमिका निभाते हैं। वरिष्ठ नेताओं की बैठकों के आयोजन और दिल्ली के बहुजन प्रेरणा केंद्र तथा नोएडा के राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल से जुड़े कार्यक्रमों की व्यवस्था में उनकी जिम्मेदारी बताई गई है। आकाश आनंद के पार्टी के प्रमुख चेहरे रहने के दौरान उनके दौरों का समन्वय भी अरविंद गौतम करते थे।
श्रीधर बसपा के कोषाध्यक्ष हैं और तमिलनाडु से जुड़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार कई भाषाओं की जानकारी के चलते दक्षिण भारतीय राज्यों में संगठन से जुड़े मामलों की निगरानी में उनकी भूमिका रही है। चुनावों के दौरान आपराधिक मामलों वाले उम्मीदवारों से संबंधित जानकारी को मीडिया और सोशल मीडिया में उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी उनसे जुड़ी रही है।
रामजी गौतम वर्तमान में बसपा के एकमात्र राज्यसभा सदस्य हैं और उनका कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त होना है। पार्टी के संसदीय मामलों में वह मायावती से मार्गदर्शन लेते हैं। इससे पहले वह पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय समन्वयक सहित विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं तथा कई राज्यों के प्रभारी रहे हैं।
विश्वनाथ पाल दिसंबर 2022 में बसपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए थे। उनकी भूमिका प्रदेश संगठन और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा से जुड़ी है। पिछड़ा वर्ग तक पार्टी की पहुंच बढ़ाने और भाईचारा समितियों के काम की निगरानी में भी उनकी भूमिका बताई गई है।
नौशाद अली बसपा के राष्ट्रीय सचिव हैं और राष्ट्रीय पदाधिकारियों में प्रमुख मुस्लिम चेहरा हैं। कन्नौज से आने वाले नौशाद अली से मायावती अल्पसंख्यक मामलों से जुड़े विषयों पर सलाह लेती हैं। फरवरी 2026 में उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए लखनऊ, कानपुर और आगरा मंडलों की जिम्मेदारी दी गई थी।
आकाश आनंद की भूमिका को लेकर बसपा में पिछले कुछ वर्षों में कई बदलाव हुए हैं। सितंबर 2026 में मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी से मुक्त किया और बाद में पार्टी से जुड़ी सभी जिम्मेदारियों से अलग करने की घोषणा की। इसके बाद 12 सितंबर को उन्होंने आकाश और ईशान दोनों को पार्टी संगठन में कोई पद न देने का अपना अंतिम फैसला बताया।
बसपा में यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में फरवरी 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा को 403 में से एक सीट मिली थी, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में पार्टी कोई सीट नहीं जीत सकी थी। ये आंकड़े चुनाव आयोग के परिणामों और हालिया रिपोर्टों के संदर्भ में पार्टी की मौजूदा चुनावी स्थिति को समझने का आधार देते हैं।








