Saharanpur News: रावण के दरबार में अंगद ने जमाया पैर, फिर जो हुआ देखने उमड़े रामलीला प्रेमी!

सहारनपुर में श्री आशुतोष रामलीला समिति के 15वें रामलीला एवं दशहरा महोत्सव में रावण-अंगद संवाद, विभीषण की शरणागति और रामसेतु निर्माण का मंचन हुआ। बच्चों के लिए रामलीला प्रश्न मंच भी आयोजित किया गया।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। श्री आशुतोष रामलीला समिति द्वारा आयोजित 15वें श्री रामलीला एवं दशहरा महोत्सव में रामायण के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। शनिवार को आयोजित लीला में हनुमान जी की वापसी, विभीषण की शरणागति, रामसेतु निर्माण और रावण-अंगद संवाद के दृश्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से भगवान श्रीराम की भक्ति, धर्म और सत्य की महत्ता को प्रस्तुत किया।

लीला का शुभारंभ हनुमान जी के लंका दहन के बाद प्रभु श्रीराम के पास लौटने के प्रसंग से हुआ। हनुमान जी ने माता सीता द्वारा दी गई चूड़ामणि प्रभु श्रीराम को सौंपी। इसके बाद रावण द्वारा विभीषण को लात मारकर लंका से निकालने और विभीषण के प्रभु श्रीराम की शरण में पहुंचने का भावपूर्ण दृश्य दिखाया गया। प्रभु श्रीराम ने विभीषण को लंका का राजा घोषित किया।

इसके बाद समुद्र तट पर प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण द्वारा शिवलिंग की स्थापना एवं पूजन का प्रसंग मंचित हुआ। समुद्र द्वारा मार्ग नहीं दिए जाने पर श्रीराम के क्रोधित होने और समुद्र को सुखाने के लिए बाण चलाने की चेतावनी देने का दृश्य भी प्रस्तुत किया गया। समुद्र देवता के प्रकट होने पर नल और नील के बारे में जानकारी देने के बाद दोनों द्वारा पत्थरों पर प्रभु श्रीराम का नाम लिखकर सेतु निर्माण करने की लीला दिखाई गई। रामसेतु तैयार होने के बाद वानर सेना के समुद्र पार करने का दृश्य भी आकर्षण का केंद्र रहा।

लीला के अगले चरण में प्रभु श्रीराम ने अंगद को रावण के दरबार में दूत बनाकर भेजा। अंगद ने रावण को प्रभु श्रीराम की शरण में आकर सीता माता को सम्मानपूर्वक लौटाने की सलाह दी। रावण के अहंकार और युद्ध की घोषणा के बीच अंगद द्वारा दरबार में पैर जमाने का दृश्य दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा। इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने अहंकार के दुष्परिणाम और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

प्रभु श्रीराम की भूमिका में गौरव चानना, लक्ष्मण के रूप में विनय दुग्गल, हनुमान जी के रूप में तरुण अरोड़ा, रावण के रूप में राजीव यादव, सुग्रीव के रूप में सन्नी भाटिया, विभीषण के रूप में शिवम कक्कड़, अंगद के रूप में ईश सलूजा और मेघनाथ के रूप में अभिषेक ने प्रभावशाली अभिनय किया। लीला का निर्देशन जय कालरा ने किया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों के लिए रामलीला से संबंधित प्रश्न मंच का आयोजन भी किया गया, जिससे बच्चों को रामायण के प्रसंगों और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं के बारे में जानने का अवसर मिला।

इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष गौरव चौधरी, महामंत्री राकेश छाबड़ा, कोषाध्यक्ष गौरव पुरी, मुख्य संयोजक संजय भसीन, प्रबंधक विनय दुग्गल, दशहरा प्रधान नरेश कुमार, प्रभु श्रीराम के सारथी संजीव टंडन, स्वागताध्यक्ष डॉ. एम.पी. सिंह चावला, श्रीरामलीला प्रबंधक अमित वत्ता एवं विजय कुमार सहित राकेश राणा, योगेश टंडन, अमन भाटिया, राघव सेठ, राजा छाबड़ा, दीक्षित छाबड़ा, मनीष कालरा, संजय आनंद, आनंद भाटिया, राजेंद्र महेंद्रा, शिवम महेंद्रा, गौरव चौहान, विकास कुमार, सन्नी शर्मा, लकी भंडारी, सिद्धार्थ पुरी, शिवम ग्रोवर और दिव्यांश अरोड़ा सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन रवि बक्शी और अमित वत्ता ने किया।

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