शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। मतदाता सूची की शुद्धता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए निर्वाचन आयोग के निर्देशों का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। निर्वाचक नामावली में नाम शामिल करने पर आपत्ति दर्ज कराने या किसी मतदाता का नाम हटाने के लिए फार्म-7 के माध्यम से आवेदन करते समय गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह जानकारी उप जिला निर्वाचन अधिकारी लवी त्रिपाठी ने दी।
उन्होंने बताया कि जिला निर्वाचन अधिकारी अरविंद कुमार चौहान के निर्देशों के तहत फार्म-7 के माध्यम से प्राप्त आवेदनों की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जांच और निस्तारण किया जाएगा। इस फार्म का इस्तेमाल निर्वाचक नामावली में किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने, किसी मतदाता का नाम हटाने अथवा निर्धारित आधारों पर स्वयं का नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है।
लवी त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत निर्वाचक नामावली की तैयारी, पुनरीक्षण या संशोधन के संबंध में जानबूझकर झूठा लिखित बयान या घोषणा करना दंडनीय अपराध है। ऐसे मामले में दोषसिद्ध होने पर एक वर्ष तक के कारावास, जुर्माने अथवा दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि फार्म-7 के प्रत्येक आवेदन में दर्ज तथ्यों, उपलब्ध अभिलेखों और साक्ष्यों की जांच की जाएगी। यदि जांच में जानबूझकर झूठी या भ्रामक जानकारी देने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में अनियमितताओं को रोकना और निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना है।
उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आपत्ति दर्ज कराने या फार्म-7 का आवेदन प्राप्त होने से किसी मतदाता का नाम सूची से स्वतः नहीं हटाया जाएगा। प्रत्येक मामले में निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, ताकि किसी पात्र मतदाता का नाम अनुचित रूप से मतदाता सूची से न हटे।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि मतदाता सूची से संबंधित आवेदन करते समय सही और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराएं। किसी भी प्रकार की गलत घोषणा करने से बचें और निष्पक्ष, पारदर्शी एवं विश्वसनीय निर्वाचन प्रक्रिया बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।








