मनोज मिड्ढा
सहारनपुर। दीपावली के त्योहार में अब महज चार दिन शेष रह गए हैं। आमतौर पर इस समय तक सहारनपुर के बाजारों में खरीदारी का जोर दिखाई देने लगता है। दुकानों पर ग्राहकों की भीड़, मिठाइयों और सजावटी सामान की खरीदारी तथा देर रात तक बाजारों में चहल-पहल रहती है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। बाजारों में लोगों की आवाजाही और सड़कों पर जाम जरूर दिखाई दे रहा है, लेकिन दुकानदारों के चेहरों पर त्योहार जैसी रौनक नहीं है। व्यापारियों का कहना है कि बाजारों में दिखाई देने वाली भीड़ का बड़ा हिस्सा खरीदारी करने वालों का नहीं, बल्कि अतिक्रमण और अव्यवस्थित यातायात के कारण लगने वाले जाम का है। ग्राहक दुकानों तक पहुंचते हैं, सामान देखते हैं और बिना खरीदारी किए वापस लौट जाते हैं।
शहर के प्रमुख बाजारों में दुकानदारों ने अपनी दुकानों के बाहर भी सामान सजा रखा है। इससे बाजारों में जगह कम हो गई है और सड़कों पर वाहनों तथा पैदल चलने वालों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। कई स्थानों पर दुकानों के बाहर रखे सामान और वाहनों की वजह से रास्ते संकरे हो गए हैं। परिणामस्वरूप बाजारों में जाम की स्थिति बन रही है। दूर से देखने पर बाजारों में भारी भीड़ नजर आती है, लेकिन दुकानदारों के अनुसार इस भीड़ का कारोबार में कोई खास फायदा नहीं मिल रहा। उनका कहना है कि यदि ग्राहक वास्तव में खरीदारी के लिए पहुंच रहे होते तो दुकानों पर बिक्री भी दिखाई देती, जबकि कई दुकानदार खाली बैठे ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं।
व्यापारियों का कहना है कि इस बार महंगाई ने आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया है। रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर कपड़े, जूते, सजावटी सामान, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद और त्योहार से जुड़ी अन्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते लोग खरीदारी करने से पहले कई बार सोच रहे हैं। पहले जहां परिवार दीपावली पर घर की सजावट, कपड़े, मिठाई, उपहार और अन्य जरूरी सामान की खरीदारी एक साथ कर लेते थे, वहीं इस बार लोग अपनी जरूरत के हिसाब से सीमित सामान खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई ग्राहक दुकानों पर पहुंचकर सामान की कीमत पूछते हैं, दूसरे दुकानों से तुलना करते हैं और फिर खरीदारी टाल देते हैं।
दुकानदारों के मुताबिक दीपावली का त्योहार व्यापारियों के लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में से एक होता है। व्यापारी कई सप्ताह पहले से त्योहार की तैयारियां शुरू कर देते हैं। बाजार में मांग बढ़ने की उम्मीद में अतिरिक्त सामान मंगाया जाता है, दुकानों को सजाया जाता है और कर्मचारियों की व्यवस्था भी की जाती है। इसके लिए पूंजी भी लगाई जाती है। लेकिन इस बार बिक्री की रफ्तार उम्मीद से काफी कम दिखाई दे रही है। दुकानदारों को चिंता है कि यदि अंतिम दिनों में भी खरीदारी नहीं बढ़ी तो उनके सामने लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है।
व्यापारियों का एक बड़ा दर्द ऑनलाइन खरीदारी को लेकर भी है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में ग्राहक अब बाजार आने के बजाय मोबाइल फोन पर ही सामान देखना और खरीदना पसंद कर रहे हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिलने वाली छूट और घर बैठे सामान उपलब्ध होने की सुविधा ने स्थानीय दुकानों के कारोबार को प्रभावित किया है। ग्राहक बाजार में सामान देखने के बाद उसकी कीमत ऑनलाइन भी जांचते हैं। यदि उन्हें ऑनलाइन कम कीमत दिखाई देती है तो वे स्थानीय दुकानदार से खरीदारी करने के बजाय ऑनलाइन ऑर्डर कर देते हैं। व्यापारियों के अनुसार इस बार ऑनलाइन कारोबार में भी पहले जैसी तेजी नहीं दिखाई दे रही है, जिससे बाजार के छोटे और मध्यम दुकानदारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि बाजारों में भीड़ और कारोबार को एक जैसा नहीं समझा जाना चाहिए। सड़कों पर लोगों और वाहनों की लंबी कतारें देखकर यह लग सकता है कि दीपावली की खरीदारी पूरे जोर पर है, लेकिन दुकानों के भीतर बिक्री की स्थिति इससे बिल्कुल अलग है। कई दुकानदारों के अनुसार दिनभर में बड़ी संख्या में लोग दुकान पर आते हैं, सामान देखते हैं, कीमत पूछते हैं और बिना कुछ खरीदे चले जाते हैं। ऐसे में बाजारों की चहल-पहल के बावजूद दुकानदारों की बिक्री में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है।
व्यापारियों का यह भी कहना है कि बाजारों में अतिक्रमण और जाम की समस्या के कारण वास्तविक खरीदारों को परेशानी उठानी पड़ रही है। परिवार के साथ खरीदारी करने आने वाले लोग वाहन खड़ा करने की जगह तलाशते रहते हैं। कई बार जाम में फंसने के कारण वे बाजार में अधिक समय नहीं बिताना चाहते। दुकानदारों का मानना है कि यदि बाजारों में यातायात व्यवस्था बेहतर हो और अतिक्रमण पर नियंत्रण रखा जाए तो ग्राहकों को खरीदारी करने में आसानी हो सकती है।
दीपावली में अब केवल चार दिन बाकी हैं। ऐसे में दुकानदारों की उम्मीदें त्योहार से ठीक पहले आने वाले अंतिम दिनों पर टिकी हैं। उन्हें आशा है कि धनतेरस और दीपावली से पहले बाजारों में खरीदारी का रुख बदलेगा और ग्राहक घरों से निकलकर स्थानीय दुकानों तक पहुंचेंगे। हालांकि मौजूदा हालात ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। इस बार सहारनपुर के बाजारों में भीड़ तो नजर आ रही है, लेकिन दुकानदारों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह भीड़ खरीदारी में कब बदलेगी।







