शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। श्री आशुतोष रामलीला समिति की ओर से आयोजित 15वें रामलीला एवं दशहरा महोत्सव में शनिवार, 10 अक्टूबर को राम वनवास की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अयोध्या में भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियों से लेकर माता कैकेयी के दो वरदान मांगने और श्रीराम के सीता व लक्ष्मण के साथ वन जाने तक के प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

मंचन में दिखाया गया कि राजा दशरथ ने प्रभु श्रीराम को अयोध्या का राजा बनाने की घोषणा की, लेकिन मंथरा ने कैकेयी को भड़काकर उनके मन में संदेह पैदा कर दिया। इसके बाद कैकेयी कोप भवन में चली गईं और राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगते हुए भरत को राजा बनाने तथा श्रीराम को चौदह वर्ष का वनवास देने की मांग रखी। कैकेयी की मांग सुनकर राजा दशरथ व्याकुल हो उठे। पिता के वचन की मर्यादा बनाए रखने के लिए प्रभु श्रीराम ने वन जाने का निर्णय लिया। सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने के लिए तैयार हो गए। इन दृश्यों का कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय किया।
राम की भूमिका में गौरव चानना, माता सीता के रूप में पूजा काला, लक्ष्मण के रूप में विनय दुग्गल, राजा दशरथ के रूप में जय कालरा, कैकेयी के रूप में अनुष्का आनंद, मंथरा के रूप में सन्नी भाटिया, सुमंत के रूप में सुमित सेठी, कौशल्या के रूप में आशा और सुमित्रा के रूप में निशा ने अपने अभिनय से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों के लिए रामलीला से संबंधित प्रश्न मंच का आयोजन भी किया गया। इसके माध्यम से बच्चों को रामायण के प्रसंगों और भगवान श्रीराम के आदर्शों से परिचित कराने का प्रयास किया गया।
इस अवसर पर समिति अध्यक्ष गौरव चौधरी, महामंत्री राकेश छाबड़ा, मोहित छाबड़ा, कोषाध्यक्ष गौरव पुरी, मुख्य संयोजक संजय भसीन, प्रबंधक विनय दुग्गल, प्रभु श्रीराम के रथ के सारथी संजीव टंडन, स्वागताध्यक्ष डॉ. एमपी सिंह चावला, श्रीरामलीला प्रबंधक अमित वत्ता, विजय कुमार, राकेश राणा, अमन भाटिया, राघव सेठ, राजा छाबड़ा, दीक्षित छाबड़ा, मनीष कालरा, संजय आनंद, आनंद भाटिया, राजेंद्र महेंद्रा, शिवम महेंद्रा और गौरव चौहान सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन रवि बख्शी और अमित वत्ता ने किया।








