शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। सर्किट हाउस रोड के चौड़ीकरण के दौरान अनुसूचित जाति के लोगों के मकान और दुकानों के हिस्से तोड़े जाने के मामले में हाईकोर्ट ने नौ अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने राज्य सरकार को भी अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद पीड़ितों ने हाईकोर्ट का रुख किया है। 12 पीड़ितों में से अब तक छह इस मामले में हाईकोर्ट पहुंचे हैं।
पीड़ित हंसराज की अपील पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मामले में आरोपी बनाए गए नौ अधिकारियों को नोटिस जारी किए। पीड़ितों के अधिवक्ता अखिलेश कुमार राजभर ने बताया कि अदालत ने सरकारी अधिवक्ता को अगली सुनवाई पर प्रदेश सरकार का पक्ष रखने के निर्देश भी दिए हैं।
पीड़ितों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत उनके मामले में नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जानी चाहिए थी। उनका आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज करने से पहले जांच कराना कानून के प्रावधानों का उल्लंघन है। पीड़ितों ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की है।
मामला सर्किट हाउस रोड के चौड़ीकरण से जुड़ा है। चौड़ीकरण से पहले सिंचाई विभाग ने अतिक्रमण चिह्नित कर संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए थे। नोटिस में चार अप्रैल तक स्वयं अतिक्रमण हटाने को कहा गया था। पीड़ितों का आरोप है कि निर्धारित समय सीमा पूरी होने से पहले ही एक अप्रैल को विभिन्न विभागों के अधिकारी अतिक्रमण हटाने पहुंच गए और उनके मकानों तथा दुकानों के आगे के हिस्से जेसीबी से ध्वस्त कर दिए। उन्होंने प्रशासन पर बदसलूकी करने का आरोप भी लगाया।
इस कार्रवाई के बाद पीड़ितों ने एससी-एसटी कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने 12 प्रार्थना पत्र खारिज कर दिए थे। इसके बाद पीड़ितों ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
पीड़ितों के स्थानीय अधिवक्ता राजकुमार के अनुसार, हाईकोर्ट ने जिन नौ अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं, उनमें तत्कालीन एसडीएम सदर, नगर आयुक्त शिपू गिरि, सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता प्रवीण जोशिया, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता, हल्का लेखपाल सचिन प्रजापति, तत्कालीन सदर बाजार थाना प्रभारी कपिल देव, तत्कालीन कुतुबशेर थाना प्रभारी एचएन सिंह और कानूनगो बृजभूषण सिंह शामिल हैं। अब मामले में अगली सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षों के जवाब और राज्य सरकार का पक्ष महत्वपूर्ण होगा।








