शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के निर्देश पर पार्टी के केंद्रीय कोऑर्डिनेटर रणधीर सिंह बेनीवाल को पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद सहारनपुर सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनके समर्थकों के बीच मायूसी का माहौल है। लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले रणधीर सिंह बेनीवाल के निष्कासन को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि बेनीवाल ने पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए कहा कि “बहनजी का हर निर्णय मेरे लिए सर्वोपरि है और उनका हर फैसला पार्टी हित में होता है।”
रणधीर सिंह बेनीवाल लंबे समय से बहुजन समाज पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में सक्रिय रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि उन्होंने सहारनपुर के अलावा पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली सहित कई राज्यों में पार्टी संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने तथा पार्टी की नीतियों और विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभिन्न चुनावों और संगठनात्मक अभियानों के दौरान भी उन्होंने सक्रिय जिम्मेदारियां निभाईं।

पार्टी से निष्कासन की खबर सामने आते ही उनके समर्थकों में निराशा देखने को मिली। कई कार्यकर्ताओं ने इसे संगठन के लिए एक बड़ा नुकसान बताते हुए कहा कि रणधीर सिंह बेनीवाल हमेशा जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय रहे और पार्टी के विस्तार के लिए लगातार प्रयास करते रहे। समर्थकों का कहना है कि उन्होंने हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा, अनुशासन और समर्पण के साथ निभाया।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए रणधीर सिंह बेनीवाल ने कहा कि वह बसपा सुप्रीमो मायावती के नेतृत्व और दूरदर्शिता पर पूरा विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष का प्रत्येक निर्णय संगठन और पार्टी हित को ध्यान में रखकर लिया जाता है। उन्होंने कहा, “बहनजी का आदेश ही मेरा मिशन है। यदि मुझसे अतीत या वर्तमान में कोई त्रुटि हुई है तो उसे सुधारने का पूरा प्रयास करूंगा।”
उन्होंने अपने समर्थकों से भी भावुक अपील करते हुए कहा कि वे संयम बनाए रखें और किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता से बचें। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन व्यक्ति को अपने सिद्धांतों और अनुशासन से कभी समझौता नहीं करना चाहिए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रणधीर सिंह बेनीवाल की सक्रियता को देखते हुए यह फैसला क्षेत्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले समय में उनके अगले राजनीतिक कदम पर भी सभी की नजरें रहेंगी। हालांकि फिलहाल उन्होंने किसी अन्य राजनीतिक विकल्प पर कोई टिप्पणी नहीं की है और केवल पार्टी नेतृत्व के प्रति सम्मान व्यक्त किया है।
उधर, बसपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच इस फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ कार्यकर्ताओं ने इसे पार्टी का आंतरिक निर्णय बताया, जबकि कई समर्थकों ने सोशल मीडिया के माध्यम से रणधीर सिंह बेनीवाल के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है।








