शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। श्रावण मास और पवित्र कांवड़ यात्रा के अवसर पर शिवभक्तों की निस्वार्थ सेवा के लिए आयोजित किए जा रहे 26वें कांवड़ सेवा शिविर का शुभारंभ रविवार को वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ किया गया। शिविर के उद्घाटन अवसर पर सेवा, समर्पण और सामाजिक सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया। आयोजन समिति ने कहा कि पिछले 26 वर्षों से यह शिविर हजारों कांवड़ यात्रियों की सेवा कर सामाजिक समरसता और मानव सेवा की अनूठी मिसाल कायम कर रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य प्रमीत कौशिक के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ। संरक्षक मंडल के सदस्य इंद्र कुमार चोपड़ा, अशोक सैनी, हरीश चौरसिया, मुकेश मेहता, अनिल अग्रवाल (वाचा), धर्मवीर मोंगा, राकेश मित्तल, रविनंदन ग्रोवर और मुरली खन्ना ने संयुक्त रूप से पूजा-अर्चना कर सेवा शिविर का शुभारंभ किया। इस दौरान भगवान शिव का पूजन कर कांवड़ यात्रा के सफल, सुरक्षित और मंगलमय संचालन की कामना की गई।

शिविर प्रारंभ होते ही हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर लौट रहे कांवड़ यात्रियों का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। शिविर में श्रद्धालुओं के लिए भोजन, शुद्ध पेयजल, विश्राम, प्राथमिक उपचार, दवा वितरण तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई है। सेवा कार्य में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक पूरे उत्साह के साथ जुटे हुए हैं, जो चौबीसों घंटे श्रद्धालुओं की सेवा कर रहे हैं।
आयोजन समिति के अध्यक्ष हितेश गर्ग, महामंत्री ईश कपूर और कोषाध्यक्ष ऋषि टंडन ने बताया कि यह सेवा शिविर पिछले 26 वर्षों से बिना किसी भेदभाव के शिवभक्तों की निस्वार्थ सेवा कर रहा है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष समाज के विभिन्न वर्गों के लोग तन, मन और धन से सहयोग कर इस सेवा अभियान को सफल बनाते हैं। इसी सहयोग और विश्वास के कारण यह सेवा परंपरा लगातार आगे बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी सेवा कार्य को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए अलग-अलग समितियों का गठन किया गया है। भोजन व्यवस्था, चिकित्सा सेवा, दवा वितरण, स्वच्छता, पेयजल, विश्राम स्थल और यातायात सहयोग जैसी व्यवस्थाओं के लिए स्वयंसेवकों की अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं, ताकि किसी भी श्रद्धालु को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
आयोजन समिति ने सभी मुख्य सहयोगियों, विशेष सहयोगियों, सम्मानित सदस्यों, दानदाताओं और सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज की सहभागिता ही इस सेवा अभियान की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने नागरिकों से भी आह्वान किया कि वे सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लें और कांवड़ यात्रियों की सेवा कर पुण्य के भागी बनें।
श्रावण मास में सहारनपुर से होकर गुजरने वाले कांवड़ मार्ग पर हर वर्ष लाखों शिवभक्त गुजरते हैं। ऐसे में सेवा शिविर श्रद्धालुओं के लिए राहत का केंद्र बनते हैं और समाज में सेवा, सहयोग और धार्मिक आस्था की भावना को और मजबूत करते हैं। 26वें वर्ष में प्रवेश करने वाला यह सेवा शिविर भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शिवभक्तों की निस्वार्थ सेवा में समर्पित है।









