शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। श्रावण मास के प्रथम सोमवार पर राधा विहार स्थित औघड़ दानी नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री रामकृष्ण विवेकानंद संस्थान के तत्वावधान में आयोजित श्रावण मास पूजा महोत्सव के अंतर्गत भगवान शिव का भव्य भूतनाथ श्रृंगार किया गया। भभूत, चंदन, अबीर, गुलाल और विभिन्न सुगंधित पूजन सामग्रियों से महादेव का मनोहारी श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मंदिर परिसर पूरे दिन हर-हर महादेव और ओम नमः शिवाय के जयघोष से गूंजता रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधि-विधान से जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन के साथ हुआ। इसके बाद भगवान शिव को भभूत, चंदन, अबीर और गुलाल से अलंकृत कर दिव्य भूतनाथ स्वरूप में सजाया गया। आकर्षक श्रृंगार के पश्चात महादेव को विशेष भोग अर्पित किया गया और सामूहिक महाआरती का आयोजन हुआ। आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान शिव से सुख, शांति, समृद्धि और लोककल्याण की कामना की।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी कालेंद्रानंद महाराज ने श्रावण मास और सोमवार की आध्यात्मिक महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव केवल एक देवता नहीं, बल्कि संपूर्ण चेतना, आत्मतत्व और परम सत्य के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि “आत्म तत्व ही परमात्मा शिव का स्वरूप है। जब मनुष्य शिव की उपासना करता है तो वह स्वयं अपने भीतर स्थित दिव्यता को जागृत करता है।”
स्वामी कालेंद्रानंद महाराज ने कहा कि भगवान शिव के शरीर पर धारण की गई भस्म इस संसार की नश्वरता का संदेश देती है। समस्त सृष्टि अंततः भस्म में ही विलीन हो जाती है, इसलिए मनुष्य को अहंकार, लोभ, मोह और क्रोध जैसे विकारों का त्याग कर सत्य, सेवा और साधना का मार्ग अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में शिवलिंग पर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और श्रद्धापूर्वक श्रृंगार करने से मन, बुद्धि और आत्मा की शुद्धि होती है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

उन्होंने कहा कि श्रावण सोमवार का व्रत और भगवान शिव का जलाभिषेक केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का माध्यम भी है। भगवान शिव की आराधना से व्यक्ति को मानसिक शांति, आध्यात्मिक जागृति और जीवन में संतुलन प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि शिव ही सृष्टि के जड़ और चेतन दोनों स्वरूपों के आधार हैं। इसलिए शिव की पूजा वास्तव में आत्मा और परमात्मा के मिलन का उत्सव है।
मंदिर परिसर को फूलों, रंग-बिरंगी सजावट और आकर्षक विद्युत झालरों से सजाया गया था। भक्ति संगीत और शिव भजनों के बीच श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ पूजा-अर्चना करते रहे। महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भी भगवान शिव का अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और विश्व कल्याण की कामना की। प्रसाद वितरण के साथ धार्मिक कार्यक्रम का समापन हुआ।
कार्यक्रम में राजेंद्र धीमान, रमेश शर्मा, अश्विनी कंबोज, सागर गुप्ता, सनी बजाज, गीता, शारदा, बबीता, राजबाला, करुणा, अनीता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने श्रावण मास में नियमित रूप से भगवान शिव की आराधना करने और समाज में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
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