कभी पुलिस की वर्दी पहनने का था सपना, भाई की हत्या के बाद बदले की आग में बना अपराधी; 24 से अधिक मुकदमे, एक लाख का इनामी और अंत पुलिस की गोलियों से

शहरी चौपाल ब्यूरो
शामली/कैराना। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वर्षों तक दहशत का पर्याय बना एक लाख रुपये का इनामी गैंग लीडर फुरकान आखिरकार बुधवार को शामली जिले के झिंझाना थाना क्षेत्र में पुलिस और एसओजी की संयुक्त कार्रवाई में मारा गया। पुलिस मुठभेड़ में घायल होने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस कार्रवाई के साथ कैराना के चर्चित व्यापारी विनोद कुमार सिंघल हत्याकांड के मुख्य आरोपी और लंबे समय से पुलिस की चुनौती बने अपराधी का अंत हो गया।
पुलिस पर की ताबड़तोड़ फायरिंग, जवाबी कार्रवाई में ढेर
पुलिस के अनुसार, झिंझाना क्षेत्र के खानपुर कलां-रंगाना जंगल में सूचना मिली थी कि कुख्यात अपराधी फुरकान अपने एक साथी के साथ किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहा है। थाना झिंझाना, बाबरी पुलिस और स्वाट टीम ने संयुक्त रूप से घेराबंदी की।
खुद को घिरा देखकर फुरकान ने पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में वह गोली लगने से घायल हो गया, जबकि उसका साथी गन्ने के खेतों का फायदा उठाकर फरार हो गया। मुठभेड़ में स्वाट टीम के हेड कांस्टेबल हरविंदर भी गोली लगने से घायल हो गए। वहीं तीन पुलिस अधिकारियों की जान उनकी बुलेटप्रूफ जैकेट ने बचाई।

घटनास्थल से पुलिस ने 9 एमएम कार्बाइन, 9 एमएम पिस्टल, 19 जिंदा कारतूस, 10 खोखे, 9,600 रुपये नकद तथा बिना नंबर प्लेट की स्प्लेंडर मोटरसाइकिल बरामद की।
2014 में व्यापारी विनोद सिंघल की हत्या से पूरे प्रदेश में मचा था हड़कंप
फुरकान का नाम पहली बार पूरे प्रदेश में तब सुर्खियों में आया जब 16 अगस्त 2014 को कैराना के बेगमपुरा बाजार में किराना व्यापारी विनोद कुमार सिंघल (गुप्ता) की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई।
पुलिस जांच में सामने आया कि व्यापारी से रंगदारी मांगी गई थी। रकम नहीं मिलने पर फुरकान और उसके साथियों ने बाजार के बीचों-बीच गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। इस घटना से पूरे व्यापारिक समुदाय में भय का माहौल बन गया था और कैराना लंबे समय तक अपराध और रंगदारी की चर्चाओं का केंद्र बना रहा।
भाई की हत्या ने बदल दी जिंदगी
स्थानीय लोगों के अनुसार फुरकान कभी एक साधारण युवक था। वर्ष 2002 तक वह बाइक मैकेनिक का काम करता था और पुलिस में भर्ती होकर वर्दी पहनने का सपना देखता था। दौड़ लगाने का शौक रखने वाला फुरकान सामान्य जीवन जी रहा था।
लेकिन वर्ष 2003 में उसके बड़े भाई अशरफ की प्रॉपर्टी विवाद में हत्या हो गई। बताया जाता है कि इसी घटना के बाद उसके जीवन की दिशा बदल गई। बदले की भावना और गलत संगत ने उसे अपराध की दुनिया में धकेल दिया।
मुकीम काला गैंग से जुड़कर बना पश्चिमी यूपी का कुख्यात अपराधी
समय के साथ फुरकान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात मुकीम काला गैंग से जुड़ गया। इसके बाद उसने हत्या, रंगदारी, लूट, गैंगस्टर, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस जैसे मामलों में लगातार अपराध किए।
उसके खिलाफ शामली, सहारनपुर और बागपत समेत कई जिलों में 24 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हुए। वह एनडीपीएस एक्ट में 10 वर्ष के कारावास की सजा भी पा चुका था, लेकिन उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद फिर फरार हो गया।
बार-बार गिरफ्तारी, फिर भी नहीं बदली राह
वर्ष 2017 में कांधला क्षेत्र के जंगल में पुलिस मुठभेड़ के दौरान वह घायल अवस्था में पकड़ा गया था। वर्ष 2019 में एनडीपीएस मामले में दोबारा गिरफ्तार हुआ। जेल से बाहर आने के बाद भी वह लगातार पुलिस से बचता रहा। उसकी गिरफ्तारी पर पहले 50 हजार और बाद में एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया।
घर को बना लिया था किले जैसा
स्थानीय लोगों के अनुसार फुरकान पिछले कुछ समय से अपने घर के बाहर किराना दुकान चलाता था। उसने घर और दुकान के आसपास कई सीसीटीवी कैमरे लगा रखे थे और हर आने-जाने वाले व्यक्ति पर नजर रखता था। सुरक्षा को लेकर वह हमेशा सतर्क रहता था और बहुत कम लोगों से सीधे संपर्क करता था।
अपराध का अंत मुठभेड़ में
करीब दो दशक तक अपराध की दुनिया में सक्रिय रहने वाला फुरकान अंततः पुलिस की गोली से मारा गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उसके मारे जाने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय अपराधियों के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। वहीं व्यापारी वर्ग ने भी राहत की सांस ली है, क्योंकि वर्षों तक दहशत फैलाने वाले अपराधी का अंत हो चुका है।








