आज सुविधा के कारण बड़ी संख्या में लोग घर बैठे ऑनलाइन कंपनियों से सामान मंगाना पसंद करते हैं। ऑनलाइन खरीदारी ने निश्चित रूप से उपभोक्ताओं को सुविधा दी है, लेकिन इसके साथ यह सवाल भी विचारणीय है कि जिन बड़ी ऑनलाइन कंपनियों से स्थानीय लोग लगातार खरीदारी करते हैं, क्या वे भी सहारनपुर में आयोजित होने वाले ऐसे धार्मिक और सामाजिक सेवा कार्यों में स्थानीय स्तर पर सहयोग करती हैं?
मनोज मिड्ढा
सहारनपुर। श्रावण मास में सहारनपुर जनपद से होकर गुजर रहे लाखों शिवभक्त कांवड़ियों की सेवा के लिए करीब 100 कांवड़ सेवा शिविर संचालित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पेयजल, जलपान, चिकित्सा, विश्राम और रात्रि ठहरने से लेकर लॉकर, मोबाइल चार्जिंग स्टेशन, पैरों की मसाज मशीन और अन्य आधुनिक सुविधाओं तक की व्यवस्था की गई है। इन व्यवस्थाओं के संचालन में बड़ी राशि खर्च हो रही है, जिसे मुख्य रूप से शहर और जिले के व्यापारी आपसी सहयोग एवं चंदे के माध्यम से जुटा रहे हैं।

कांवड़ यात्रा के दौरान व्यापारियों की इस सेवा भावना के बीच अब स्थानीय व्यापार को मजबूत करने की अपील भी जोर पकड़ रही है। व्यापारियों का कहना है कि वे सालभर अपने कारोबार के साथ सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में भी बढ़-चढ़कर सहयोग करते हैं। कांवड़ यात्रा में शिवभक्तों की सेवा इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। ऐसे में स्थानीय जनता को भी अपने शहर के व्यापारियों और बाजार के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
कांवड़ शिविरों में सुविधाओं पर हो रहा बड़ा खर्च
कांवड़ सेवा शिविर अब केवल भोजन और पानी तक सीमित नहीं हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए अनेक शिविरों में सोने और आराम करने के लिए व्यवस्था, चिकित्सा सेवाएं, स्वच्छ पेयजल, मोबाइल फोन चार्जिंग, सामान सुरक्षित रखने के लिए लॉकर और लंबी पैदल यात्रा से थके कांवड़ियों के लिए फुट मसाज मशीनों तक की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
इन व्यवस्थाओं के लिए टेंट, बिस्तर, बिजली, जनरेटर, भोजन सामग्री, दूध, फल, पानी, चिकित्सा सामग्री, सफाई व्यवस्था और अन्य संसाधनों पर लगातार खर्च किया जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि यह पूरा सेवा कार्य स्थानीय व्यापारिक संगठनों और व्यापारियों के सहयोग से संचालित हो रहा है।
व्यापारी सिर्फ दुकान नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी भी निभाते हैं
व्यापारियों का कहना है कि उनका रिश्ता केवल ग्राहक और दुकानदार तक सीमित नहीं है। जिस शहर में वे व्यापार करते हैं, उसी शहर के धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भी वे अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। कांवड़ सेवा शिविरों के अलावा रामलीला, धार्मिक आयोजनों, सामाजिक कार्यक्रमों और जरूरतमंदों की सहायता में भी स्थानीय व्यापारी लगातार सहयोग करते रहे हैं।
व्यापारियों के अनुसार, जब भी शहर में कोई बड़ा धार्मिक या सामाजिक आयोजन होता है तो आर्थिक सहयोग के लिए स्थानीय बाजार सबसे आगे रहता है। इसलिए अब समय आ गया है कि स्थानीय व्यापार को मजबूत करने में जनता भी अपनी भूमिका निभाए।
ऑनलाइन खरीदारी पर व्यापारियों का सवाल
व्यापारियों का कहना है कि आज सुविधा के कारण बड़ी संख्या में लोग घर बैठे ऑनलाइन कंपनियों से सामान मंगाना पसंद करते हैं। ऑनलाइन खरीदारी ने निश्चित रूप से उपभोक्ताओं को सुविधा दी है, लेकिन इसके साथ यह सवाल भी विचारणीय है कि जिन बड़ी ऑनलाइन कंपनियों से स्थानीय लोग लगातार खरीदारी करते हैं, क्या वे भी सहारनपुर में आयोजित होने वाले ऐसे धार्मिक और सामाजिक सेवा कार्यों में स्थानीय स्तर पर सहयोग करती हैं?
व्यापारियों का सवाल है कि क्या इन ऑनलाइन कंपनियों ने सहारनपुर के कांवड़ मार्ग पर कोई सेवा शिविर लगाया है? क्या उन्होंने शिवभक्तों के लिए भोजन, पेयजल, चिकित्सा या विश्राम की व्यवस्था में सहयोग किया है?
व्यापारियों का कहना है कि किसी कंपनी या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की आलोचना करना उद्देश्य नहीं है, लेकिन जनता को यह जरूर समझना चाहिए कि स्थानीय दुकानदार इसी शहर में रहता है, यहीं परिवार का पालन-पोषण करता है और शहर के सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों में भी योगदान देता है।
स्थानीय दुकानदार से खरीदारी का पैसा शहर में ही रहता है
व्यापारियों के अनुसार, स्थानीय बाजार से खरीदारी करने का लाभ केवल दुकानदार तक सीमित नहीं रहता। स्थानीय दुकान पर काम करने वाले कर्मचारी, माल की ढुलाई करने वाले श्रमिक, ट्रांसपोर्टर, गोदाम, पैकिंग, डिलीवरी और अन्य छोटे कारोबारी भी इसी व्यापारिक व्यवस्था से जुड़े होते हैं।
जब स्थानीय बाजार में खरीदारी बढ़ती है तो पैसा शहर के भीतर ही अलग-अलग माध्यमों से घूमता है और इससे स्थानीय रोजगार एवं अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत ऑनलाइन खरीदारी बढ़ने से स्थानीय दुकानदारों के सामने प्रतिस्पर्धा और कारोबार का दबाव बढ़ता है।
ऑनलाइन खरीदारी पूरी तरह छोड़ना नहीं, स्थानीय बाजार को प्राथमिकता देना जरूरी
व्यापारियों की अपील ऑनलाइन खरीदारी को पूरी तरह बंद करने की नहीं, बल्कि जहां संभव हो वहां स्थानीय दुकानदार को प्राथमिकता देने की है। उनका कहना है कि कपड़े, जूते, स्टेशनरी, घरेलू सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, किराना, उपहार सामग्री और रोजमर्रा की अनेक वस्तुएं स्थानीय बाजार में उपलब्ध हैं। यदि गुणवत्ता और कीमत उचित हो तो इन्हें अपने शहर की दुकान से खरीदने की आदत विकसित की जानी चाहिए।
व्यापारियों का कहना है कि ‘अपने शहर का बाजार, अपने शहर की ताकत’ है। यदि सहारनपुर का स्थानीय बाजार मजबूत रहेगा तो छोटे व्यापारी सुरक्षित रहेंगे, रोजगार के अवसर बने रहेंगे और व्यापार से जुड़े हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
कांवड़ के बाद रामलीला में भी व्यापारी निभाते हैं अहम भूमिका
व्यापारियों ने कहा कि कांवड़ यात्रा के बाद रामलीला सहित अनेक धार्मिक और सामाजिक आयोजन होने हैं। इन आयोजनों में भी स्थानीय व्यापारी वर्षों से बढ़-चढ़कर आर्थिक एवं अन्य प्रकार का सहयोग करते आए हैं। इसलिए व्यापारियों और जनता के बीच सहयोग का यह संबंध केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे वर्ष चलता है।
व्यापारियों का कहना है कि वे आज कांवड़ियों की सेवा में योगदान दे रहे हैं और कल भी शहर के सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। ऐसे में जनता को भी स्थानीय व्यापार को सहयोग देकर इस आर्थिक और सामाजिक चक्र को मजबूत करना चाहिए।
व्यापारियों की अपील—स्थानीय खरीदारी को बनाएं आदत
व्यापारिक संगठनों से जुड़े लोगों ने सहारनपुर की जनता से अपील की है कि सुविधा के साथ-साथ स्थानीय बाजार के हित को भी ध्यान में रखें। जहां संभव हो, ऑनलाइन सामान मंगाने के बजाय अपने आसपास की दुकानों से खरीदारी करें।

व्यापारियों का कहना है कि स्थानीय दुकानदार से खरीदा गया सामान केवल एक खरीदारी नहीं है, बल्कि वह किसी परिवार की आय, किसी कर्मचारी के रोजगार और शहर की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का माध्यम भी है।
व्यापारियों का संदेश स्पष्ट है—वे समाज के धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, अब जनता भी स्थानीय बाजार को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाए।
यदि सहारनपुर की जनता स्थानीय व्यापारियों से अधिक खरीदारी करेगी तो शहर का व्यापार मजबूत होगा, रोजगार सुरक्षित होंगे और व्यापारी भी भविष्य में कांवड़ सेवा, रामलीला तथा अन्य सामाजिक आयोजनों में और अधिक उत्साह के साथ सहयोग कर सकेंगे।
स्थानीय बाजार मजबूत होगा तो सहारनपुर का व्यापार मजबूत होगा और व्यापार मजबूत होगा तो शहर की अर्थव्यवस्था भी खुशहाल होगी।








