मुंबई। बॉलीवुड में कादर खान का नाम एक ऐसे कलाकार के तौर पर लिया जाता है, जिन्होंने अभिनय के साथ-साथ अपनी लेखनी से भी हिंदी सिनेमा पर गहरी छाप छोड़ी। उनकी शानदार संवाद अदायगी और कॉमिक टाइमिंग ने दर्शकों को खूब हंसाया, लेकिन फिल्मों में उनकी एंट्री अभिनेता के रूप में नहीं, बल्कि लेखक के तौर पर हुई थी। उन्होंने अपने दौर के कई बड़े सितारों के लिए यादगार संवाद लिखे, जिन्हें सिनेमाघरों में खूब तालियां मिलीं।
कादर खान पेशे से प्रोफेसर थे और लेखन में उनकी गहरी रुचि थी। इसी प्रतिभा ने उन्हें फिल्मी दुनिया तक पहुंचाया। उनके करियर से जुड़ा मनमोहन देसाई का एक किस्सा आज भी बेहद चर्चित है। बताया जाता है कि देसाई उस दौर के संवाद लेखकों से बहुत संतुष्ट नहीं थे। उन्हें ऐसे संवाद चाहिए थे, जिन्हें सुनते ही दर्शक तालियां बजाने लगें।
मनमोहन देसाई ने दिया था चुनौती भरा सवाल
एक पुराने इंटरव्यू में कादर खान ने मनमोहन देसाई से पहली मुलाकात का किस्सा साझा किया था। उनके मुताबिक, देसाई ने उनसे कहा था कि उस समय के कई लेखक संवादों में सिर्फ शेर-ओ-शायरी और मुहावरों का इस्तेमाल करते हैं, जबकि उन्हें ऐसे डायलॉग चाहिए जिन पर दर्शक तालियां बजाएं।
कादर खान ने चुनौती स्वीकार कर ली। इसके बाद उन्हें फिल्म ‘रोटी’ के क्लाइमेक्स के संवाद लिखने का मौका मिला। कादर खान ने इस काम को बेहद गंभीरता से लिया और पूरी रात जागकर क्लाइमेक्स तैयार किया।
संवाद सुनकर खुश हो गए निर्देशक
अगले दिन कादर खान मनमोहन देसाई के घर पहुंचे। देसाई उस समय अपने बच्चों के साथ क्रिकेट खेल रहे थे। कादर खान ने उन्हें लिखे हुए संवाद सुनाने शुरू किए। बताया जाता है कि देसाई ने उनसे संवाद दोबारा सुनाने को कहा। कादर खान ने फिर वही संवाद सुनाए और निर्देशक उन्हें बार-बार सुनते रहे।
संवादों से प्रभावित होकर मनमोहन देसाई घर के अंदर गए और एक ब्लैक एंड व्हाइट टीवी लेकर आए। कादर खान के मुताबिक, उन्होंने इसे उनके लिए इनाम बताया। इतना ही नहीं, देसाई ने अपने हाथ से सोने का ब्रेसलेट भी उतारकर उन्हें दे दिया।
21 हजार की फीस बढ़ाकर कर दी 1.21 लाख
इसके बाद मनमोहन देसाई ने कादर खान से उनकी फीस के बारे में पूछा। कादर खान ने बताया कि पिछली फिल्म के लिए उन्हें 21 हजार रुपये मिले थे। इस पर देसाई ने कहा कि उनके राइटर की फीस सिर्फ 21 हजार रुपये कैसे हो सकती है।
इसके बाद उन्होंने कादर खान की फीस बढ़ाकर 1.21 लाख रुपये कर दी। यह उस दौर के लिहाज से बड़ी रकम मानी जाती थी। इस घटना ने कादर खान के लेखन करियर को नई ऊंचाई देने में अहम भूमिका निभाई।
लेखन से अभिनय तक बनाई अलग पहचान
कादर खान ने आगे चलकर कई लोकप्रिय फिल्मों के लिए लेखन किया और बाद में अभिनेता के रूप में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई। अमिताभ बच्चन समेत कई बड़े सितारों के लिए उनके लिखे संवाद बेहद लोकप्रिय हुए। ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘अमर अकबर एंथनी’ और ‘अग्निपथ’ जैसी फिल्मों से भी उनका नाम जुड़ा रहा।
कादर खान की खासियत यही थी कि वह संवादों में आम आदमी की भाषा, हास्य, भावनाओं और परिस्थितियों को बेहद प्रभावी ढंग से पिरो देते थे। यही वजह रही कि उनका लिखा संवाद पर्दे पर आते ही दर्शकों से सीधा जुड़ जाता था। अभिनय और लेखन दोनों क्षेत्रों में उनका योगदान हिंदी सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा।








