शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। कविता, लेखन और रंगमंच के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर सहारनपुर का नाम रोशन करने वाली दिवंगत साहित्यिक एवं रंगमंचीय हस्तियों की स्मृति में एक भावपूर्ण सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साहित्य और रंगमंच के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले दिवंगत रचनाकारों एवं रंगकर्मियों को श्रद्धापूर्वक याद करते हुए उनकी स्मृतियों और साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में सहारनपुर की साहित्यिक और रंगमंचीय परंपरा को समृद्ध करने वाली दिवंगत हस्तियों गीतकार राजेंद्र राजन, कवि सुरेश सपन, बाल साहित्य के प्रेरणास्रोत कृष्ण शलभ, कवि योगेश छिब्बर, कवयित्री इंद्रा गौड़, विभा मिश्रा, रंगकर्मी विजेश जोशी, शीतल त्यागी, राम कुमार तेजान, शिवपाल, चित्रा भार्गव एवं विजय पाल सिंह को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।
साहित्यकारों और रंगकर्मियों की स्मृति में गौरव सम्मान
इन दिवंगत साहित्यकारों और रंगकर्मियों की स्मृति में साहित्य एवं कला के क्षेत्र में सक्रिय व्यक्तित्वों को गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान पाने वालों में कवि वीरेश त्यागी, कवि विनोद भृंग, डॉ. संदीप मिश्रा, डॉ. हरिओम गुप्ता, साधना शर्मा, सुमेधा नीरज, संजय गुप्ता, निर्मला सनावर, दिनेश तेजान, प्रवेश धवन, राजीव सिंघल, विपिन शर्मा एवं अंजली शर्मा शामिल रहे।
आयोजकों ने कहा कि किसी भी शहर की सांस्कृतिक पहचान वहां के साहित्यकारों, कलाकारों और रंगकर्मियों की रचनात्मक विरासत से बनती है। सहारनपुर ने कविता, गीत, कहानी, बाल साहित्य और रंगमंच के क्षेत्र में लंबे समय से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपने शहर की साहित्यिक विरासत से जोड़ने का काम करते हैं।
राजेंद्र राजन की स्मृतियों से भावुक हुए श्रोता
कार्यक्रम में गीतकार राजेंद्र राजन के मित्र एवं उत्तराखंड के ख्यात रंगकर्मी वीके डोभाल की विशेष उपस्थिति रही। उन्हें भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के विधिवत शुभारंभ से पहले गीतकार राजेंद्र राजन की आवाज में उनके गीतों की रिकॉर्डिंग सुनाई गई। उनकी आवाज में गीत सुनते ही कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों के बीच उनकी स्मृतियां ताजा हो गईं। राजेंद्र राजन से जुड़े इस भावुक क्षण में कई श्रोताओं की आंखें नम हो गईं।
वक्ताओं ने कहा कि राजेंद्र राजन केवल लोकप्रिय गीतकार ही नहीं थे, बल्कि अपने समय और समाज के प्रति गहरी संवेदना रखने वाले रचनाकार भी थे। उनकी रचनाओं में मानवीय संबंधों, प्रेम, करुणा और जीवन के विविध अनुभवों की सहज अभिव्यक्ति दिखाई देती है। उनकी रचनाएं आज भी साहित्य और संगीत प्रेमियों को भावनात्मक रूप से जोड़ती हैं।
साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि दिवंगत साहित्यकारों और रंगकर्मियों को याद करना केवल औपचारिक श्रद्धांजलि नहीं है, बल्कि उनकी रचनात्मक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को संवेदनशील बनाने का कार्य करता है और रंगमंच सामाजिक सरोकारों को प्रभावी ढंग से सामने लाने का सशक्त माध्यम है।
सहारनपुर की साहित्यिक और रंगमंचीय परंपरा में जिन रचनाकारों ने अपनी पहचान बनाई, उनके योगदान को याद करना शहर के सांस्कृतिक इतिहास को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजनों से युवा साहित्यकारों और कलाकारों को प्रेरणा मिलती है तथा उन्हें अपनी रचनात्मक यात्रा आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
सम्मान समारोह ने बांधा साहित्यप्रेमियों को
गौरव सम्मान समारोह में साहित्य, कला और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान दिवंगत रचनाकारों की स्मृतियों को साझा किया गया और उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा की गई। उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने कहा कि रचनाकार भले ही हमारे बीच न रहें, लेकिन उनकी रचनाएं और विचार समाज में लंबे समय तक जीवित रहते हैं।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने दिवंगत साहित्यिक एवं रंगमंचीय हस्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को नमन किया। साथ ही सम्मानित किए गए साहित्यकारों एवं कला क्षेत्र से जुड़े व्यक्तित्वों को शुभकामनाएं दीं।









