शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। स्ट्रोक को लंबे समय से बुजुर्गों से जुड़ी बीमारी माना जाता रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अब कम उम्र होना स्ट्रोक से सुरक्षा की गारंटी नहीं है। 35 से 40 वर्ष की ीउम्र के लोगों में भी स्ट्रोक के मामले सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार बदलती जीवनशैली, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी जैसे कारण कम उम्र में स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता, लक्षणों की समय पर पहचान और स्वस्थ जीवनशैली स्ट्रोक के गंभीर परिणामों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार आज कई ऐसे मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं, जो उम्र के उस दौर में होते हैं जब उनका करियर, परिवार और भविष्य की योजनाएं अपने महत्वपूर्ण पड़ाव पर होती हैं। ऐसे में अचानक शरीर के एक हिस्से में कमजोरी आना, बोलने में परेशानी होना या चेहरा टेढ़ा हो जाना परिवार के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति बन जाती है। कई बार कम उम्र होने के कारण मरीज और उसके परिजन शुरुआत में यह मान ही नहीं पाते कि यह स्ट्रोक हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि 30 और 40 वर्ष की उम्र में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल पहले की तुलना में अधिक आम हो चुके हैं। चिंता की बात यह है कि इनमें से कई लोगों को अपने शरीर में मौजूद इन समस्याओं की जानकारी तक नहीं होती। वे स्वयं को स्वस्थ मानते रहते हैं क्योंकि उन्हें कोई स्पष्ट परेशानी महसूस नहीं होती। विशेषज्ञों के अनुसार यही स्थिति जोखिम को बढ़ा सकती है।
डॉक्टर बताते हैं कि शरीर हमेशा किसी बीमारी की शुरुआत का संकेत स्पष्ट रूप से नहीं देता। कई स्वास्थ्य समस्याएं लंबे समय तक बिना किसी खास लक्षण के बनी रह सकती हैं। देर रात तक जागना, लंबे समय तक लैपटॉप या मोबाइल के सामने बैठे रहना, लगातार तनाव में रहना, बाहर का असंतुलित भोजन, नियमित व्यायाम के लिए समय नहीं निकालना और धूम्रपान जैसी आदतें लंबे समय में स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक रक्तचाप, शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसे जोखिम कारकों की नियमित जांच कराना जरूरी है।
कम उम्र में होने वाले स्ट्रोक के सभी मामले केवल खराब जीवनशैली से जुड़े हों, ऐसा भी नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ लोगों में जन्मजात हृदय संबंधी समस्याएं, खून के जल्दी जमने की प्रवृत्ति, कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां अथवा गर्दन की रक्त वाहिकाओं में चोट जैसे कारण भी स्ट्रोक की वजह बन सकते हैं। इसलिए कम उम्र के किसी मरीज में स्ट्रोक होने पर उसके कारणों का चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक होता है। केवल उम्र के आधार पर बीमारी के कारण का अनुमान लगाना उचित नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार स्ट्रोक की स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण चीज समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होना है। कई बार अचानक हाथ-पैर में कमजोरी आने पर लोग इसे सामान्य कमजोरी समझ लेते हैं। कुछ लोग इसे सर्वाइकल की समस्या मानकर आराम करने लगते हैं, जबकि कुछ लोग पहले दर्द की दवा या घरेलू उपचार आजमाते हैं। इस दौरान बीतने वाला समय बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। स्ट्रोक के संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना चाहिए।
डॉक्टरों के अनुसार हर सिरदर्द या चक्कर स्ट्रोक का संकेत नहीं होता, लेकिन यदि अचानक चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा हो जाए, एक हाथ या पैर में कमजोरी या सुन्नपन आ जाए, बोलने में परेशानी हो, शब्द स्पष्ट न निकलें, किसी की बात समझने में दिक्कत हो अथवा अचानक दिखाई देने में बदलाव महसूस हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अचानक चलने या शरीर का संतुलन बनाए रखने में परेशानी होना भी गंभीर संकेत हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रोक के संदिग्ध लक्षणों में मरीज के स्वयं ठीक होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। समय पर अस्पताल पहुंचने से चिकित्सक स्थिति का आकलन कर उचित उपचार की दिशा में कदम उठा सकते हैं। ऐसे मामलों में परिवार के सदस्यों की जागरूकता भी बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि कई बार मरीज स्वयं अपनी स्थिति को समझ नहीं पाता।
डॉक्टरों के अनुसार स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच के साथ रक्तचाप और ब्लड शुगर की निगरानी, संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, धूम्रपान से दूरी और तनाव को नियंत्रित करने जैसी स्वस्थ आदतों को अपनाना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रोक को केवल बुजुर्गों की बीमारी समझकर कम उम्र में दिखाई देने वाले गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जागरूकता और समय पर चिकित्सकीय सहायता कई गंभीर परिस्थितियों में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
डिस्क्लेमर: इस समाचार में दी गई जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। यह किसी बीमारी के निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या लक्षण की स्थिति में योग्य चिकित्सक से व्यक्तिगत सलाह लेना आवश्यक है। डाइट, व्यायाम या किसी उपचार में बदलाव चिकित्सकीय सलाह के बाद ही करें। शहरी चौपाल इस जानकारी के आधार पर किए गए किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय की जिम्मेदारी नहीं लेता है।








