नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में टी20 प्रारूप के बढ़ते प्रभाव को लेकर पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने कहा है कि आईपीएल ने युवा खिलाड़ियों के लिए पहचान और आर्थिक लाभ हासिल करने का रास्ता काफी आसान बना दिया है। उनका मानना है कि इसके चलते युवा क्रिकेटरों का ध्यान कुछ हद तक लाल गेंद यानी टेस्ट क्रिकेट से सफेद गेंद के क्रिकेट की ओर खिसका है।
हरभजन सिंह के मुताबिक आईपीएल आज खिलाड़ियों के लिए बहुत बड़ा मंच बन चुका है। यहां अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को कम समय में पहचान मिलने के साथ आर्थिक रूप से भी बड़ा लाभ हासिल होता है। उन्होंने कहा कि कई बार खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन के बाद रातोंरात स्टार बन जाते हैं और इसके बाद उनके लिए भारतीय टीम तक पहुंचने के अवसर भी बढ़ जाते हैं।
उन्होंने पुराने दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले खिलाड़ियों को भारत के लिए खेलने के लिए कई वर्षों तक घरेलू क्रिकेट में मेहनत करनी पड़ती थी। उस समय कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी लगातार रन बनाने के बावजूद भारतीय टीम में जगह नहीं बना पाते थे, क्योंकि सीनियर टीम में खिलाड़ियों के लिए सीमित स्थान होते थे।
हरभजन ने अमोल मजूमदार और अमरजीत केपी जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन भारतीय टीम के लिए खेलने का अवसर नहीं मिल सका।
हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि मौजूदा दौर में भारतीय क्रिकेटरों के सामने अवसर पहले की तुलना में अधिक हैं। अब क्रिकेट के तीनों प्रारूपों—टेस्ट, वनडे और टी20—में भारतीय टीम के लिए खेलने के मौके उपलब्ध हैं। ऐसे में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने के रास्ते भी बढ़े हैं।
हरभजन के बयान ने टी20 क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव और टेस्ट क्रिकेट के प्रति युवा खिलाड़ियों की बदलती प्राथमिकताओं को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज कर दी है।








