नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन और उनके कथित अनुभवों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि युवाओं ने अपनी आवाज उठाते हुए जिस साहस और मजबूती का परिचय दिया, वह सराहनीय है। राहुल गांधी ने विशेष रूप से उन छात्राओं की प्रशंसा की, जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान कथित दुर्व्यवहार, गाली-गलौज और हिंसा का सामना करने के बावजूद अपनी बात रखी।
राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया पर छात्रों के साथ हुई अपनी बातचीत का एक वीडियो साझा किया। यह बातचीत इस महीने की शुरुआत में हुई थी। वीडियो में छात्रों ने प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर किए गए प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई और उत्पीड़न से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। छात्रों ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले महीने प्रदर्शन किया था।
राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं ने अपनी मांगों को लेकर शांति, मोहब्बत और हंसी-मजाक के साथ आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि उन्हें देश के युवाओं पर गर्व है और खासकर उन लड़कियों का साहस प्रशंसनीय है, जिन्होंने कथित दबाव और दुर्व्यवहार के बावजूद अपनी बात सामने रखी।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि कुछ छात्राओं को भाजपा से जुड़े लोगों की ओर से कथित बदसलूकी, गाली-गलौज और हिंसा का सामना करना पड़ा। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की आवाज को अब दबाया नहीं जा सकेगा। उन्होंने युवाओं की ओर से जवाबदेही की मांग को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया।
राहुल गांधी ने यह भी बताया कि 22 अगस्त को छात्रों के साथ संवाद का कार्यक्रम पुणे पहुंचेगा। इस बार कार्यक्रम विशेष रूप से छात्राओं के लिए आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब लड़कियां अपनी बात रखेंगी और देश उनकी आवाज सुनेगा।
इससे पहले राहुल गांधी ने पांच अगस्त को छात्रों से मुलाकात के बाद संवाददाता सम्मेलन किया था। उनके साथ पांच छात्र मीडिया के सामने आए थे। इनमें मॉडल रिया अहीर भी शामिल थीं। छात्र आंदोलन के दौरान मुंबई में पुलिस वैन के सामने खड़े होकर उसे रोकने की रिया की तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रसारित हुई थी। रिया ने बाद में ऑनलाइन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत भी की थी।
राहुल गांधी की ओर से छात्रों और छात्राओं के मुद्दों को लेकर लगातार संवाद किए जाने से यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। उन्होंने छात्रों की मांगों और उनके कथित अनुभवों को सार्वजनिक चर्चा में लाने की बात कही है।








