शहरी चौपाल ब्यूरो
गंगोह। श्री श्याम परिवार के तत्वावधान में प्रभा गार्डन में आयोजित शिव महापुराण कथा में कथाव्यास आचार्य रजनीश ने कहा कि बिना बुलाए कहीं नहीं जाना चाहिए, अन्यथा अपमान का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बुलावे पर आदर के साथ जाने से सम्मान मिलता है, जबकि बिना बुलाए जाने पर अपमान सहना पड़ता है।
कथाव्यास ने माता सती के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि अपने पिता महाराजा दक्ष प्रजापति के यहां बिना बुलाए जाने और भगवान शिव के मना करने के बावजूद वहां पहुंचने पर माता सती को अपमानित होना पड़ा और उन्होंने यज्ञ कुंड में अपने प्राण त्याग दिए। इसके बाद भगवान शिव के गणों ने दक्ष का यज्ञ विध्वंस कर दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में मान-सम्मान का विशेष महत्व है और व्यक्ति को परिस्थितियों तथा संबंधों की मर्यादा को समझकर ही निर्णय लेना चाहिए।
इससे पूर्व आचार्य रजनीश ने भगवान शिव एवं माता पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग का रसपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भक्तिरस में डूबे नजर आए। भजनों की अमृत वर्षा से कथा स्थल का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। कथा प्रारंभ होने से पूर्व आयोजकों ने कथाव्यास का स्वागत कर माला पहनाई और उन्हें व्यास गद्दी पर विराजमान कराया।
मंगलवार सुबह आचार्य रजनीश की देखरेख में 15 सदस्यीय विद्वानों की टीम ने वैदिक रीति-रिवाज के साथ पीत वस्त्र एवं चंदन तिलकधारी श्रद्धालुओं की मौजूदगी में पार्थिव शिवलिंग की प्रतिष्ठापना कराकर महारुद्राभिषेक कराया। भगवान शिव को विभिन्न प्रकार के पुष्प, भांग, धतूरा, फल एवं मिष्ठान अर्पित किए गए। मंत्रोच्चारण के बीच भगवान शिव का भस्म स्नान भी कराया गया। यजमानों ने विधि-विधान से अभिषेक कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और विश्व कल्याण की कामना की।
कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ की आरती में भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया।








