मनोज मिड्ढा
सहारनपुर। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के परिवार से शाजान मसूद और शियान मसूद के समाजवादी पार्टी में जाने के बाद सहारनपुर की सियासत में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह वाकई मसूद परिवार में राजनीतिक मतभेद और फूट का संकेत है या फिर आने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर परिवार की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है?
राजनीतिक हलकों में इसे लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। एक तरफ इसे परिवार के भीतर राजनीतिक रास्तों के अलग होने के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सूत्रों का दावा है कि इसके पीछे एक सुनियोजित रणनीति हो सकती है। हालांकि, इस रणनीति को लेकर परिवार की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।
दरअसल, इमरान मसूद पहले यह घोषणा कर चुके हैं कि कांग्रेस से उनके परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा। ऐसे में अब परिवार के अलग-अलग सदस्यों का दूसरी राजनीतिक पार्टियों के साथ जुड़ना इस पुराने फैसले के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि परिवार का कोई सदस्य कांग्रेस से चुनाव नहीं लड़ता, तो उसके लिए अन्य दलों के विकल्प खुले रहते हैं।
इसी बिंदु को लेकर सियासी चर्चा यह है कि परिवार के अलग-अलग सदस्य यदि अलग-अलग राजनीतिक दलों में अपनी जगह बनाते हैं, तो भविष्य में परिवार की राजनीतिक मौजूदगी एक से अधिक दलों में बनी रह सकती है। सूत्रों का कहना है कि जिस दल में परिवार का सदस्य सक्रिय होगा, वहां से चुनावी टिकट हासिल करने की संभावना भी मजबूत हो सकती है। हालांकि, यह अभी राजनीतिक विश्लेषण और सूत्रों पर आधारित चर्चा है, इसकी पुष्टि परिवार की ओर से नहीं की गई है।
सियासत में परिवारों के अलग-अलग राजनीतिक दलों में सक्रिय रहने के उदाहरण पहले भी देखने को मिलते रहे हैं। ऐसे में मसूद परिवार के मामले को भी इसी नजरिये से देखा जा रहा है। यदि इसे रणनीति माना जाए तो इसका उद्देश्य परिवार की राजनीतिक पहुंच को अलग-अलग क्षेत्रों और दलों में बनाए रखना हो सकता है। दूसरी तरफ यदि वास्तव में परिवार के भीतर मतभेद हैं, तो आने वाले समय में इसके संकेत सार्वजनिक बयानों और राजनीतिक गतिविधियों से स्पष्ट हो सकते हैं।
सहारनपुर की राजनीति में मसूद परिवार की लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसलिए परिवार के किसी भी सदस्य का राजनीतिक रूप से नया कदम स्थानीय सियासत में चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है। शाजान मसूद और शियान मसूद के समाजवादी पार्टी में जाने को लेकर भी अब इसी वजह से राजनीतिक समीकरणों को जोड़कर देखा जा रहा है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मसूद परिवार में वास्तव में राजनीतिक फूट पड़ी है या फिर यह परिवार की लंबी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है? इसका जवाब आने वाले दिनों में परिवार के नेताओं की गतिविधियों और बयानों से ही साफ होगा। फिलहाल सूत्रों की मानें तो इसे फूट से ज्यादा रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसके तहत परिवार के सदस्य अलग-अलग राजनीतिक मंचों पर अपनी जगह मजबूत कर सकते हैं।








