शहरी चौपाल ब्यूरो
देवबंद। रोहाना कलां के ग्रामीण संपर्क मार्ग पर लगाए गए टोल बैरियर को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि रास्ते पर बैरियर लगाकर वाहनों को रोककर शुल्क वसूला जा रहा है। खास बात यह है कि उपलब्ध प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2024 में भी इसी तरह के बैरियर को लेकर शिकायत सामने आई थी, जिसके बाद प्रशासन ने मौके से बैरियर हटवाया था। ऐसे में अब दोबारा बैरियर लगाए जाने से इसकी वैधता और शुल्क वसूली के अधिकार को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि वर्ष 2024 में प्रशासन ने बैरियर को हटवाया था तो वर्तमान में इसे किस आदेश और किस कानूनी अधिकार के तहत दोबारा स्थापित किया गया है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि किसी ग्रामीण संपर्क मार्ग पर वाहनों को रोककर शुल्क वसूली किए जाने की स्थिति में संबंधित एजेंसी के पास सक्षम प्राधिकारी की अनुमति और वैधानिक अधिकार होना आवश्यक है।
शासनादेश और अनुमति को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग
मामले में मुजफ्फरनगर-सहारनपुर वाया देवबंद मार्ग का भी उल्लेख किया जा रहा है। यह मार्ग एसएच-59 के रूप में अधिसूचित राज्य राजमार्ग है और इसकी टोल व्यवस्था निर्धारित परियोजना तथा स्वीकृत व्यवस्था के अनुसार संचालित होती है। ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि रोहाना कलां के संपर्क मार्ग पर लगाए गए बैरियर का संबंधित टोल व्यवस्था से क्या संबंध है और वहां वाहन रोककर शुल्क वसूलने की अनुमति किस सक्षम प्राधिकारी ने दी है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की जाए और संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि केवल यह बता देना पर्याप्त नहीं है कि बैरियर अधिकृत है, बल्कि उसके लिए जारी आदेश और भूमि संबंधी रिकॉर्ड भी सामने आने चाहिए।
2024 में भी सामने आया था मामला
बताया गया है कि वर्ष 2024 में रोहाना खुर्द के रास्ते पर बैरियर लगाए जाने को लेकर शिकायत हुई थी। उस समय तत्कालीन अपर जिलाधिकारी प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए मौके से बैरियर हटवाया था। अब दोबारा इसी तरह की व्यवस्था सामने आने के बाद ग्रामीण यह जानना चाहते हैं कि वर्तमान बैरियर के संबंध में क्या नई अनुमति अथवा आदेश जारी हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व की प्रशासनिक कार्रवाई और वर्तमान स्थिति के बीच स्पष्टता जरूरी है। यदि किसी नए आदेश के तहत बैरियर लगाया गया है तो वह आदेश सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को इसकी वैधानिक स्थिति की जानकारी हो सके।
खसरा नंबर और राजस्व रिकॉर्ड की भी हो जांच
मामले में बैरियर जिस भूमि पर लगाया गया है, उसके स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि बैरियर स्थल का खसरा नंबर, खसरा-खतौनी, राजस्व नक्शा और भूमि की प्रकृति की जांच कराई जाए।
इसके अलावा संबंधित टोल एजेंसी को वहां वाहन रोकने और शुल्क वसूलने का अधिकार किस दस्तावेज के आधार पर मिला है, इसकी भी जांच की मांग की गई है। ग्रामीणों के अनुसार टोल अधिसूचना, संबंधित अनुबंध और परियोजना से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकती है।
दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी वैधानिकता
जानकारों के अनुसार यदि बैरियर स्थल अधिकृत टोल क्षेत्र में शामिल है और वहां शुल्क वसूली के लिए सक्षम प्राधिकारी की वैध अनुमति उपलब्ध है तो संबंधित दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। वहीं यदि स्थल स्वीकृत टोल क्षेत्र का हिस्सा नहीं है और वाहन रोककर शुल्क वसूली के लिए अलग से आवश्यक अनुमति उपलब्ध नहीं है तो वसूली की वैधानिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि, अंतिम स्थिति संबंधित सरकारी अभिलेखों, अधिसूचनाओं और अनुमति दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
प्रशासन से मौके पर जांच कराने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कर बैरियर की स्थिति, भूमि रिकॉर्ड, टोल क्षेत्र की सीमा और शुल्क वसूली के अधिकार की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के बाद यह स्पष्ट किया जाए कि बैरियर किस आदेश के तहत लगाया गया है और वहां शुल्क वसूली का कानूनी आधार क्या है।
फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड में वर्ष 2024 में प्रशासन द्वारा बैरियर हटाए जाने का तथ्य सामने आता है। ऐसे में वर्तमान बैरियर को लेकर पारदर्शिता और प्रशासनिक स्तर पर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन मामले की जांच कर वर्तमान बैरियर की वैधता और शुल्क वसूली के आधार को लेकर क्या स्थिति स्पष्ट करता है।








