शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। सिद्धपीठ स्वामी तुरीयानन्द सत्संग सेवा आश्रम, मण्डी समिति रोड़ कृष्णा नगर सहारनपुर में आज सतगुरू ब्रहमलीन श्रीश्री 1008 स्वामी तुरीयानन्द जी महाराज का 151वां अवतरण दिवस वार्षिक महोत्सव गद्दीनशीन श्रीश्री 1008 स्वामी विवेकानन्द गिरि जी महाराज की अध्यक्षता में बड़ी श्रद्धाभाव व धूमधाम से मनाया गया। इस धार्मिक कार्यक्रम में देश के विभिन्न प्रांतों से काफी संख्या में श्रद्धालु भक्तजनों ने भाग लिया। स्वामी विवेकानन्द गिरि महाराज ने अपने प्रवचनों में बताया कि हिन्दू धर्म, सनातन धर्म के नाम से भी जाना जाता है। सनातन का शाब्दिक अर्थ है शाश्वत, नित्य, सदा रहने वाला या अनादि। इसका सीधा अर्थ है जिसका न कोई आदि है और न ही कोई अन्त है यानि जो हमेशा से है और हमेशा रहेगा। दूसरे शब्दों में जो सत्य है, वही सनातन है, वो ही शाश्वत है, जो शाश्वत है, वो ही सनातन है। उन्होंने बताया कि हिन्दू धर्म ग्रन्थों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार युग, कुल चार होते हैं-सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग व कलयुग। अब प्रश्न यह है कि इन चारों युगों में अन्तर क्या है? यह मैं अपने आप से पूछता हूं, आप भी अपने आप से यह पूछ सकते हैं। उन्होंने बताया कि उनका मानना है कि सतयुग, त्रेता युग व द्वापर युग, यानि तीनों युगों में कलयुग था क्योंकि तीनों युगों में निर्गुण-निराकार भगवान विष्णु के अवतार सगुण-साकार बनके इस धरा पर अवतरित हुए। सतयुग में, दूसरों का संहार करने के लिए भगवान विष्णु के पांच अमानवीय अवतार लेने पड़े। त्रेता युग में भगवान विष्णु के अवतार भगवान श्री राम व द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण अवतरित हुए। अगर त्रेता युग में कलयुग न होता, तो भगवान श्री राम के राज्याभिषेक के समय षड़यन्त्र न होता। अगर त्रेता युग में कलयुग न होता तो रावण द्वारा मॉ सीता का छल-कपट से हरण न होता। द्वापर में भी कलयुग था। अगर द्वापर में भी कलयुग न होता तो भरी सभा में बैठे, बड़े-बड़े सूरमा, योद्धा व ज्ञानी जैसे गुरू द्रोणाचार्य, गुरू कृपाचार्य, भीष्म पितामह जैसे महान लोगों के सामने, एक अबला स्त्री द्रोपदी का चीर-हरण करने के लिए, दुर्योधन लालायित न होता। इसका मतलब है कि सतयुग में भी कलयुग था, त्रेता में भी कलयुग था और द्वापर में भी कलयुग था, लेकिन हमें सतयुग, त्रेता व द्वापर में कलयुग नहीं ढूंढना है, बल्कि हमें कलयुग में सतयुग लाने की कोशिश करनी है। वही स्कन्ध पुराण, कल्कि पुराण व श्रीमद भागवत पुराण में उल्लेख है कि कलयुग जब अपनी चरम सीमा पर होगा, जब असत्य और अर्धम अपने उच्चतम स्तर तक पहुंच जाएगा तब सम्बल नामक ग्राम में, भगवान विष्णु के अन्तिम कल्कि अवतार के रूप में अवतरित होंगे। श्री महाराज ने नगर के उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों का धन्यवाद किया एवं आयी हुई संगत को प्रसाद वितरण किया। इस अवसर पर विशाल भण्डारे का आयोजन भी किया गया। स्वामी तुरीयानन्द ट्रस्ट के प्रधान ओमप्रकाश अरोडा, उप प्रधान महेन्द्र पाल ढल्ल, महासचिव प्रवीण वधावन, कोषाध्यक्ष अमित वत्ता, संयुक्त सचिव सुभाष चन्द मल्होत्रा व ट्रस्टी सुदर्शन बजाज ने समस्त संगत का धन्यवाद अदा किया।








