नई दिल्ली। पेपर लीक और NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रदर्शनों के सिलसिले में छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश पारित किया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दायरे में दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले शामिल हैं। अदालत का यह फैसला उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके खिलाफ पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने के बाद आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए थे।
जंतर-मंतर पर हुए थे प्रदर्शन
सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली के जंतर-मंतर और उसके आसपास 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस अवधि में हजारों छात्र आंदोलन में शामिल हुए थे। इन प्रदर्शनों के संबंध में दिल्ली पुलिस की ओर से 13 एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी अदालत के सामने रखी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान छात्रों को राहत देने का निर्णय लिया। अदालत का रुख यह रहा कि विरोध प्रदर्शन में शामिल होने मात्र के कारण छात्रों को आपराधिक मामलों में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
पुराने आपराधिक रिकॉर्ड वालों को राहत नहीं
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने राहत के साथ महत्वपूर्ण शर्त भी स्पष्ट की है। जिन लोगों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है, वे इस आदेश का लाभ नहीं उठा सकेंगे। दिल्ली पुलिस के अनुसार ऐसे 2,873 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
अदालत के समक्ष यह भी स्पष्ट किया गया कि पुराने आपराधिक मामलों वाले लोगों के संबंध में कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, ऐसे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने की बात भी सुनवाई के दौरान सामने आई।
दूसरे राज्यों की एफआईआर पर भी अदालत की नजर
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल की ओर से इसी तरह के निर्देश देश के अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भी जारी करने का अनुरोध किया गया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने संकेत दिया कि यदि किसी अन्य राज्य में इस प्रकार की कोई एफआईआर है, जिसकी जानकारी अभी अदालत के समक्ष नहीं आ सकी है, तो उसे भी आदेश के दायरे में लाने पर विचार किया जाएगा।
अदालत ने यह सुनिश्चित करने की बात कही कि आदेश के दायरे में आने वाले छात्रों को केवल इसलिए परेशानी का सामना न करना पड़े कि उनके मामले की जानकारी अदालत तक नहीं पहुंच पाई।
NEET 2026 से जुड़े आत्महत्या मामलों में मुआवजे पर भी विचार
सुनवाई के दौरान NEET 2026 परीक्षा से जुड़े एक अन्य गंभीर मुद्दे पर भी चर्चा हुई। परीक्षा से कथित रूप से जुड़े तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा दिए जाने के प्रश्न पर सुप्रीम कोर्ट ने विचार किया।
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि अदालत के समक्ष यह जानकारी रखी गई है कि इस संबंध में एक नीति तैयार की जाएगी। बताया गया कि प्रस्तावित नीति अगले तीन महीनों के भीतर तैयार किए जाने की बात कही गई है।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। साथ ही अदालत ने पुराने आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को राहत से अलग रखकर यह भी स्पष्ट किया है कि आदेश का लाभ सभी आरोपितों को स्वतः नहीं मिलेगा।








