शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद मलबा हटाने के दौरान सामने आए कुएं की पुरातात्विक जांच के लिए सोमवार को पुरातत्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने कुएं की गहराई, चौड़ाई, निर्माण शैली और उसमें लगी ईंटों का निरीक्षण किया। जांच के बाद नगर मजिस्ट्रेट एवं पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने प्रेस वार्ता कर कुएं से संबंधित प्रारंभिक जानकारी पत्रकारों को दी। अधिकारियों के अनुसार मौके पर मिला कुआं करीब 200 से 250 वर्ष पुराना प्रतीत हो रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान कुएं की गहराई लगभग 20 फीट पाई गई है, जबकि कुएं की चौड़ाई करीब तीन फीट है। कुएं के ऊपरी हिस्से में भी लगभग तीन फीट की अलग से बाउंड्री अथवा मुंह का निर्माण दिखाई दिया है। कुएं के अंदर लगी ईंटों की बनावट और उनकी स्थिति को देखते हुए प्रारंभिक तौर पर इनके करीब 200 से 250 वर्ष पुरानी होने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह अभी प्रारंभिक आकलन है और विस्तृत जांच के बाद ही कुएं की वास्तविक ऐतिहासिक स्थिति के संबंध में कोई निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
पुरातत्व विभाग की टीम ने मौके पर कुएं की संरचना का बारीकी से निरीक्षण किया। टीम ने कुएं के अंदर मौजूद निर्माण सामग्री और ईंटों को देखा तथा उसकी बनावट को समझने का प्रयास किया। अधिकारियों के मुताबिक कुएं के अंदर अभी मलबा भरा हुआ है। इस कारण इसकी पूरी संरचना और नीचे की स्थिति का अभी विस्तृत अध्ययन नहीं हो सका है।
अधिकारियों ने बताया कि यदि प्रशासन की ओर से अनुमति मिलती है तो कुएं के अंदर जमा मलबे को हटाकर खुदाई कराई जा सकती है। मलबा हटने के बाद कुएं के भीतर से किसी प्रकार की अन्य पुरानी संरचना, सामग्री या अवशेष मिलते हैं अथवा नहीं, इसका पता लगाया जा सकेगा। इसके अलावा कुएं के ऊपरी तीन फीट के हिस्से में भी आवश्यकता के अनुसार खुदाई कराए जाने की जरूरत बताई गई है। इससे कुएं के निर्माण और उसके आसपास की पुरानी संरचना के संबंध में और अधिक जानकारी मिल सकती है।
कुएं के मिलने के बाद इसे लेकर अलग-अलग तरह के दावे और चर्चाएं सामने आई थीं। कुछ हिंदू संगठनों और शिकायतकर्ता की ओर से इस स्थान को पुराने मंदिर से जोड़कर जांच की मांग की गई थी। हालांकि सोमवार को पुरातत्व विभाग की टीम द्वारा की गई प्रारंभिक जांच के बाद अधिकारियों ने कुएं को किसी विशेष धर्म से जोड़कर कोई टिप्पणी नहीं की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कुएं की पुरातात्विक स्थिति और उसके निर्माण काल की जांच की जा रही है तथा इसे किसी धार्मिक स्थल से जोड़ना फिलहाल जांच का विषय है।
पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने यह भी बताया कि सहारनपुर जनपद में इस प्रकार के पुराने कुएं अन्य स्थानों पर भी पाए गए हैं। इसलिए केवल कुएं की मौजूदगी के आधार पर उसके संबंध में किसी धार्मिक या ऐतिहासिक निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। कुएं के अंदर से मिलने वाले अवशेष और उसके निर्माण की विस्तृत जांच के बाद ही उसके इतिहास के बारे में अधिक जानकारी सामने आ सकती है।
मौके पर अधिकारियों ने कुएं की मौजूदा स्थिति का निरीक्षण करने के साथ-साथ उसकी संरचना से संबंधित तथ्य भी दर्ज किए। जांच के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी बनाए रखी गई। कुएं के आसपास अनावश्यक आवाजाही रोकने के लिए अधिकारियों ने निगरानी रखी, ताकि पुरातात्विक जांच के दौरान संरचना को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।
प्रारंभिक जांच में कुएं की उम्र 200 से 250 वर्ष आंकी जाना इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि अधिकारियों ने इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं बताया है। कुएं के अंदर मौजूद मलबे को हटाने और जरूरत पड़ने पर ऊपरी हिस्से में खुदाई के बाद इसकी संरचना से जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना है।
फिलहाल पुरातत्व विभाग की जांच में कुएं की गहराई करीब 20 फीट और चौड़ाई लगभग तीन फीट पाई गई है तथा इसमें लगी ईंटें करीब दो से ढाई सौ वर्ष पुरानी प्रतीत हो रही हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अभी तक जांच में कुएं को किसी धर्म या धार्मिक स्थल से जोड़ने वाली कोई बात सामने नहीं आई है। आगे की खुदाई और विस्तृत जांच के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।








