कलक्ट्रेट मस्जिद मामले के विरोध में मंसूर बदर का बड़ा फैसला, मुशायरा संयोजक बनने से किया इनकार

पार्षद ने महापौर डॉ. अजय कुमार सिंह को पत्र भेजकर मेला गुघाल के ऑल इंडिया मुशायरे की जिम्मेदारी नहीं देने का अनुरोध किया, बोले- मस्जिद प्रकरण से पार्षद दल आहत

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। कलक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण को लेकर नगर निगम के पार्षद एवं कार्यकारणी सदस्य मंसूर बदर ने एक बड़ा सांकेतिक फैसला लिया है। उन्होंने आगामी मेला गुघाल में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम ऑल इंडिया मुशायरे का संयोजक बनने से इनकार कर दिया है। इस संबंध में उन्होंने महापौर डॉ. अजय कुमार सिंह को पत्र भेजकर इस बार उन्हें मुशायरे का कन्वीनर नहीं बनाए जाने का अनुरोध किया है।

मंसूर बदर ने कहा कि कलक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के मामले को लेकर उनका और पार्षद दल का दिल आहत है। उन्होंने बताया कि उर्दू अदब और मुशायरों को बढ़ावा देना उनका पुराना शौक रहा है। उनके परिवार की ओर से लंबे समय से सहारनपुर में मुशायरों का आयोजन कराया जाता रहा है। उनके वालिद-ए-मरहूम जनाब अय्यूब हसन बदर नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन रहे हैं, जबकि उनकी माता मोहतरमा अफसरी बेगम हेल्थ चेयरमैन रही हैं। मंसूर बदर के अनुसार, वह वर्ष 1995 से सभासद और पार्षद के रूप में नगर की सेवा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि खानवाड़ा बदर की ओर से अब तक करीब 46 मुशायरों का आयोजन कराया जा चुका है। इन आयोजनों के माध्यम से देश-विदेश के अनेक शायरों को सहारनपुर में अपनी कला और अदबी प्रतिभा प्रस्तुत करने का मंच मिला। उन्होंने दावा किया कि सहारनपुर का ऑल इंडिया मुशायरा कभी देश के सबसे बड़े मुशायरों में शुमार होता रहा है।

मंसूर बदर ने कहा कि उर्दू अदब और मुशायरा उनके लिए केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लंबे समय से जुड़ी भावनाओं का विषय है। इसके बावजूद कलक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण को लेकर उत्पन्न परिस्थितियों के कारण उन्होंने इस बार मुशायरे की संयोजक की जिम्मेदारी नहीं लेने का निर्णय किया है। उन्होंने महापौर को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि आगामी मेला गुघाल में होने वाले ऑल इंडिया मुशायरे का कन्वीनर उन्हें न बनाया जाए।

उन्होंने इसे एक सांकेतिक शुरुआत बताते हुए कहा कि अब देखना होगा कि इस मुहिम में कौन-कौन लोग उनके साथ शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि उनका फैसला किसी सांस्कृतिक आयोजन के विरोध में नहीं, बल्कि कलक्ट्रेट मस्जिद प्रकरण को लेकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का एक तरीका है।

इस दौरान पार्षद सईद सिद्दीकी, पार्षद इज़हार मंसूरी, पार्षद गुलज़ेब खान, पार्षद रईस पप्पू, पार्षद समीर अंसारी, पार्षद जफर अंसारी, पार्षद डॉ. मंसूर, पार्षद मेनपाल और पार्षद आसिफ अंसारी मौजूद रहे।

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