शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। नगर निगम सहारनपुर के 58 वार्डों की सफाई व्यवस्था के लिए प्रस्तावित ठेका निविदा को लेकर वार्ड-47 खालापार के पार्षद अभिषेक अरोड़ा (टिंकू) ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने नगरायुक्त को शिकायती पत्र देकर निविदा में शामिल मैसर्स सुकमा सन्स की पात्रता, कार्य अनुभव, पूर्व में किए गए कार्यों और निविदा में लगाए गए दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है। पार्षद ने शिकायत के साथ अलीगढ़ नगर निगम की ओर से संबंधित फर्म को जारी किए गए नोटिसों की प्रतियां भी संलग्न करने की बात कही है।
शिकायती पत्र में पार्षद ने कहा है कि नगर निगम में 58 वार्डों की सफाई व्यवस्था का ठेका आवंटित किया जाना प्रस्तावित है। उनके अनुसार मैसर्स सुकमा सन्स भी निविदा प्रक्रिया में शामिल है, लेकिन फर्म के कार्य अनुभव और पूर्व कार्यों को लेकर उन्हें आपत्तियां हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्म के पास अपेक्षित कार्य अनुभव नहीं है और अलीगढ़ में उसके कामकाज को लेकर समाचार पत्रों में भी खबरें प्रकाशित हुई हैं। पार्षद ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही फर्म की निविदा पात्रता तय किए जाने का अनुरोध किया है।
अभिषेक अरोड़ा ने शिकायत में अलीगढ़ नगर निगम में फर्म के कथित कामकाज का भी उल्लेख किया है। उनका दावा है कि प्रदेश के 17 नगर निगमों में से संबंधित फर्म वर्तमान में केवल अलीगढ़ नगर निगम में कार्यरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां सफाई व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं और निर्धारित संख्या में कर्मचारियों की तैनाती, सड़कों की सफाई, कूड़ा उठाने के वाहनों तथा नालियों और नालों की सफाई को लेकर भी सवाल हैं। हालांकि ये सभी आरोप पार्षद द्वारा शिकायत में लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
पार्षद ने यह भी आरोप लगाया कि अलीगढ़ में फर्म के कामकाज को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन नोटिसों और फर्म के विरुद्ध की गई कार्रवाई की जानकारी को सहारनपुर की निविदा प्रक्रिया में भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि सहारनपुर की सफाई व्यवस्था शहर की मूलभूत जरूरतों से जुड़ी है, इसलिए ठेका ऐसी एजेंसी को दिया जाना चाहिए जिसके अनुभव और कार्यक्षमता का पूरी तरह सत्यापन हो।
शिकायती पत्र में सॉल्वेंसी प्रमाणपत्र को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई है। अभिषेक अरोड़ा का कहना है कि फर्म की ओर से प्रस्तुत किया गया सॉल्वेंसी प्रमाणपत्र कथित तौर पर स्पष्ट रूप से पठनीय नहीं है। उन्होंने प्रमाणपत्र में बैंक का नाम, शाखा, फर्म का नाम और संबंधित खाते का स्पष्ट उल्लेख होने की आवश्यकता बताते हुए इसकी वैधता और प्रमाणिकता की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सॉल्वेंसी प्रमाणपत्र निविदा प्रक्रिया का महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, इसलिए उसकी बैंक स्तर पर भी पुष्टि कराई जानी चाहिए।
उन्होंने नगरायुक्त से मांग की है कि मैसर्स सुकमा सन्स की ओर से निविदा में दाखिल किए गए सभी दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं। इसके साथ ही फर्म के अनुभव प्रमाणपत्र, वित्तीय क्षमता, सॉल्वेंसी प्रमाणपत्र और पूर्व में किए गए कार्यों की स्थिति की जांच की जाए। पार्षद ने यह भी कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि सहारनपुर मंडलायुक्त को भी इस संबंध में किसी व्यक्ति की ओर से शिकायत दी गई है। उन्होंने उस शिकायत की भी जांच कराए जाने की मांग की है।
अभिषेक अरोड़ा ने कहा कि सहारनपुर नगर निगम की सफाई व्यवस्था सीधे शहर के स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी है। ऐसे में ठेका देने से पहले संबंधित फर्म की योग्यता और पिछला रिकॉर्ड पूरी तरह जांचा जाना जरूरी है। उन्होंने नगरायुक्त से आग्रह किया कि किसी भी प्रकार के दबाव के बजाय नियमों और दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लिया जाए, जिससे भविष्य में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल न उठें।
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी फर्म को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना नहीं, बल्कि सहारनपुर की सफाई व्यवस्था को बेहतर और पारदर्शी बनाए रखना है। उन्होंने मांग की कि निविदा में शामिल सभी फर्मों की पात्रता समान मानकों पर जांची जाए और जिस एजेंसी के पास निर्धारित अनुभव, संसाधन और वित्तीय क्षमता हो, उसी को नियमानुसार जिम्मेदारी दी जाए।
अब पार्षद की शिकायत के बाद नगर निगम स्तर पर दस्तावेजों और फर्म की पात्रता की जांच किस तरह की जाती है, इस पर निगाह रहेगी। यदि जांच में शिकायत में लगाए गए आरोपों से संबंधित कोई अनियमितता सामने आती है तो निविदा प्रक्रिया पर उसका प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, फर्म की ओर से इन आरोपों पर क्या पक्ष रखा जाता है, यह भी आगे महत्वपूर्ण होगा।








