शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर , रामपुर मनिहारान । प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridor) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। पर्याप्त कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं होने के कारण पहले चिह्नित 17 गांवों की भूमि को अब औद्योगिक क्षेत्र के लिए प्रस्तावित नहीं किया जाएगा। नई रिपोर्ट में छह गांवों की करीब 650 से 700 हेक्टेयर भूमि चिह्नित कर भेजी गई है। हालांकि इन गांवों में भी अभी भूमि का अंतिम चयन नहीं हुआ है। विभिन्न स्तरों पर समीक्षा और स्थलीय निरीक्षण के बाद ही भूमि की उपयुक्तता पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से संपर्क क्षेत्र में शासन की योजना के तहत औद्योगिक क्षेत्र प्रस्तावित किया गया था। इसके क्रम में 23 मार्च 2026 को औद्योगिक क्षेत्र के लिए जमीन चिह्नित करने का आदेश जारी हुआ था। इसके बाद एसडीएम रामपुर मनिहारान की ओर से छह जुलाई को विभिन्न गांवों में भूमि की उपलब्धता की रिपोर्ट दी गई थी। इसमें मुंडीखेड़ी, उमरी कला, अंबेहटा चांद, चकवाली, मिर्जापुर समेत कई गांवों की करीब 10 हजार बीघा भूमि चिह्नित की गई थी।
विभिन्न स्थलों की समीक्षा और स्थलीय निरीक्षण में सामने आया कि चिह्नित भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार पर्याप्त कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं है। इसके चलते उक्त भूमि को औद्योगिक क्षेत्र के लिए उपयुक्त नहीं माना गया और एसडीएम से पुनः भूमि चिह्नित कर रिपोर्ट मांगी गई।
नई रिपोर्ट में शिवदासपुर, नैनपुर नगला, मोहम्मदपुर गाडा, चकवाली, सिरसली कला और सिरसली खुर्द गांवों में करीब 650 से 700 हेक्टेयर भूमि चिह्नित कर भेजी गई है। इन गांवों में भी भूमि की उपयुक्तता का निर्णय विभिन्न स्तरों पर समीक्षा और स्थलीय निरीक्षण के बाद ही लिया जाएगा।
यूपीसीडा के भूमि अध्याप्ति अधिकारी उमेश शुक्ला ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र के लिए जिन गांवों की भूमि प्रस्तावित की जाती है, उनका परीक्षण किया जाता है। औद्योगिक क्षेत्र बनाए जाने की स्थिति में संबंधित किसानों से सहमति प्राप्त करने की प्रक्रिया होती है। 70 प्रतिशत किसानों की सहमति मिलने के बाद ही भूमि के भू-अर्जन की कार्रवाई आगे बढ़ती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि का अंतिम चिह्नांकन समीक्षा और स्थलीय निरीक्षण के बाद ही होगा।
भूमि चिह्नित होने के बाद भी किसानों की जमीन का सीधे अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। किसानों की सहमति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही भू-अर्जन की कार्रवाई आगे बढ़ेगी। ऐसे में प्रस्तावित छह गांवों के किसानों के लिए आने वाले समय में भूमि की समीक्षा, स्थलीय निरीक्षण और सहमति की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।








