शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। कलक्ट्रेट परिसर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बीच उत्तराखंड से सहारनपुर पहुंचे महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने पुलिस लाइन में एसएसपी से मुलाकात की। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर पुलिस-प्रशासन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में किसी की दादागिरी नहीं चलेगी और सभी को कानून का पालन करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी पक्ष को कार्रवाई से आपत्ति है तो वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने कहा कि कलक्ट्रेट परिसर में लंबे समय से अवैध गतिविधियां चलने के आरोप लगाए जा रहे थे। प्रशासन की कार्रवाई के बाद परिसर को सुरक्षित किया गया है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई किसी अधिकारी के निजी निर्णय से नहीं हुई, बल्कि मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद की गई है। उनके अनुसार संबंधित पक्ष को यदि आदेश पर आपत्ति है तो हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार है, लेकिन किसी को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
उन्होंने विवादित संपत्ति को वक्फ की जमीन बताए जाने के दावे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि जमीन वक्फ की थी तो संबंधित पक्ष को अदालत के समक्ष उसके दस्तावेज प्रस्तुत करने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत तथ्यों की जांच होनी चाहिए।
ध्वस्तीकरण के बाद मलबे के नीचे मिले कुएं का जिक्र करते हुए स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने कहा कि कुएं का हिंदू समाज में धार्मिक महत्व माना जाता है। उन्होंने दावा किया कि कुएं के ऊपर मस्जिद का निर्माण किए जाने की बात सामने आ रही है, इसलिए इसकी पूरी जांच होनी चाहिए। उन्होंने मलबे से मिली 1906 और 1909 जैसी तारीखों वाली ईंटों का भी उल्लेख किया और कहा कि ये तारीखें ईंट-भट्ठे के ट्रेडमार्क से संबंधित हो सकती हैं, इसलिए इसकी भी जांच जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी पक्ष को प्रशासन की कार्रवाई पर आपत्ति है तो वह संवैधानिक और न्यायिक संस्थाओं के समक्ष अपना पक्ष रख सकता है। उन्होंने लोगों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी स्थिति में कानून हाथ में नहीं लेने की अपील की।








