शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना पारंपरिक कारीगरों को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने में मददगार साबित हो रही है। योजना का लाभ ग्राम जड़ौदा पांडा निवासी देवेंद्र कुमार पुत्र चंद्र सिंह को मिला, जिन्होंने सरकारी सहायता और अपने हुनर के बल पर माटीकला के कारोबार को नई ऊंचाई दी है।
देवेंद्र कुमार ने योजना के तहत आवेदन किया, जिसके बाद पंजाब नेशनल बैंक जड़ौदा पांडा से उन्हें दो लाख रुपये का ऋण स्वीकृत एवं वितरित किया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड की ओर से उन्हें सात दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण से उनके पारंपरिक कौशल में निखार आया और मिट्टी से बने उत्पादों की गुणवत्ता के साथ उत्पादन क्षमता में भी सुधार हुआ।
योजना के तहत स्वीकृत ऋण के सापेक्ष देवेंद्र कुमार को 25 प्रतिशत अनुदान भी प्रदान किया गया। इससे उन्हें अपना स्वरोजगार स्थापित करने और कारोबार को आगे बढ़ाने में आर्थिक मदद मिली। वर्तमान में वह मिट्टी से विभिन्न प्रकार के फ्लावर पॉट, गमले, पानी के फैंसी कैंपर, ग्लास सहित अन्य आकर्षक उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इन उत्पादों की आसपास के शहरों में बिक्री हो रही है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है।
माटीकला के क्षेत्र में देवेंद्र कुमार को एक और उपलब्धि उस समय मिली, जब मंडल स्तरीय माटीकला पुरस्कार योजना के अंतर्गत उनके तैयार उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। उत्कृष्ट उत्पादों के लिए उनका चयन प्रथम स्थान के लिए हुआ और विभाग की ओर से उन्हें 15 हजार रुपये की पुरस्कार धनराशि प्रदान की गई।
देवेंद्र कुमार ने मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के लिए प्रदेश सरकार का आभार जताते हुए कहा कि ऋण, प्रशिक्षण और अनुदान की मदद से उनके पारंपरिक हुनर को स्वरोजगार में बदलने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण से काम की गुणवत्ता में सुधार हुआ, जबकि ऋण और अनुदान से कारोबार को विस्तार देने में मदद मिली। उन्होंने अन्य माटीकला कारीगरों और बेरोजगार युवाओं से भी सरकार की स्वरोजगारपरक योजनाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाने की अपील की।








