शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। अगर आपकी जेब में ₹20 का सिक्का है तो एक बार उसे ध्यान से जरूर देख लीजिए। सहारनपुर में ₹20 के नकली सिक्के तैयार करने वाली फैक्ट्री का खुलासा होने के बाद बाजार में चल रहे नकली सिक्कों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस ने नकली सिक्के बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि यह फैक्ट्री गंगोह के नजदीक थाना तितरो क्षेत्र में संचालित की जा रही थी।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक फैक्ट्री में रोजाना करीब 10 से 11 हजार नकली ₹20 के सिक्के तैयार किए जाते थे। तैयार सिक्कों को बाजार में खपाने के लिए अलग-अलग स्थानों पर भेजा जाता था। पुलिस की कार्रवाई में नकली सिक्के बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें, उपकरण और तैयार सिक्के बरामद किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब बरामद सामान और सिक्कों की जांच कर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।
मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि आरोपियों द्वारा लंबे समय से नकली सिक्के तैयार किए जाने की आशंका है। बताया जा रहा है कि इस गिरोह ने कई करोड़ रुपये मूल्य के नकली सिक्के बाजार में उतार दिए हैं। हालांकि बाजार में वास्तव में कितने नकली सिक्के पहुंच चुके हैं और उनकी कुल कीमत कितनी है, इसकी आधिकारिक पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।

पुलिस गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि नकली सिक्कों के निर्माण के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं और इन्हें बाजार तक पहुंचाने का नेटवर्क किस तरह काम करता था। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि तैयार सिक्कों की सप्लाई केवल सहारनपुर और आसपास के इलाकों में की जाती थी या इन्हें दूसरे जिलों तक भी भेजा जाता था।
नकली सिक्कों की फैक्ट्री पकड़े जाने के बाद आम लोगों के लिए भी सतर्क रहने की जरूरत है। ₹20 का सिक्का लेते समय उसकी बनावट, वजन, आकार, किनारों और उस पर बनी आकृतियों को ध्यान से देखा जा सकता है। असली सिक्के पर अंकित डिजाइन और लिखावट सामान्य तौर पर स्पष्ट और समान होती है। यदि किसी सिक्के की बनावट असामान्य लगे, डिजाइन धुंधला हो या वजन और आकार सामान्य सिक्के से अलग महसूस हो तो सावधानी बरतनी चाहिए।
हालांकि केवल सिक्के की चमक, रंग या चुंबक से उसकी असलियत तय करना भरोसेमंद तरीका नहीं है। किसी सिक्के पर संदेह होने पर उसे बैंक में दिखाकर सत्यापन कराना बेहतर है। संदिग्ध सिक्के को बिना पुष्टि के किसी अन्य व्यक्ति को चलाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के बाद इस पूरे नेटवर्क की जांच जारी है। पांच आरोपियों की गिरफ्तारी से नकली सिक्कों के निर्माण और सप्लाई से जुड़ी कई अहम कड़ियां सामने आने की उम्मीद है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अब तक कितने नकली सिक्के तैयार किए, उन्हें कहां-कहां भेजा गया और इस कारोबार में इनके साथ और कितने लोग जुड़े हुए हैं।








