हिंदी को ज्ञान-विज्ञान और शोध की भाषा बनाने के लिए नवाचार जरूरी : कुलपति

मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस पर क्विज, पोस्टर प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक और कविता वाचन का आयोजन

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी वर्णमाला, वर्तनी एवं तकनीकी शब्दावली क्विज, पोस्टर प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक एवं कविता वाचन सहित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति रुचि एवं सम्मान की भावना विकसित करने के साथ भाषा के व्यावहारिक, रचनात्मक और तकनीकी पक्ष को प्रोत्साहित करना रहा।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. वाई. विमला ने कहा कि हिंदी दिवस केवल संवाद की भाषा के रूप में हिंदी के महत्व को रेखांकित करने का अवसर नहीं, बल्कि भाषा के माध्यम से भावनाओं, विचारों और संस्कृति को अभिव्यक्त करने का भी अवसर है। हिंदी को जन-जन तक पहुंचाने के लिए इसे सहज, प्रभावी, परिष्कृत एवं व्यावहारिक रूप में अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हिंदी के शुद्ध एवं सार्थक प्रयोग के साथ नवीन तकनीकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समन्वय भी जरूरी है। भाषा के विकास के लिए संरक्षण के साथ नवाचार, प्रमाणिक शोध और तकनीकी समन्वय पर भी जोर देना होगा।

कार्यक्रम में छात्र कर्णपाल ने गायन प्रस्तुति के माध्यम से हिंदी के महत्व को संगीतमय रूप में प्रस्तुत किया। विभिन्न प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। पोस्टर प्रतियोगिता में शबा नाज प्रथम, आरती द्वितीय तथा मोहम्मद नदीम और आरजू बर्मन तृतीय रहे। हिंदी वर्णमाला, वर्तनी एवं तकनीकी शब्दावली क्विज में तरंग यादव ने प्रथम, खुशी एवं पंकज हाटवाल ने द्वितीय तथा आंशिका कपिल, खुशनसीब परवीन एवं अमित कुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। दस छात्रों की टीम ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया।

मंच संचालन अंशिका कपिल एवं तरंग यादव ने किया। कार्यक्रम में शैक्षणिक समन्वयक डॉ. विनोद कुमार, पुस्तकालय समन्वयक डॉ. आरके गुप्ता सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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