Saharanpur News: मेला गुघाल के 3.30 करोड़ के ठेके और फोटो-वीडियोग्राफी टेंडर पर सवाल

मेला गुघाल के 3.30 करोड़ रुपये के तीन वर्षीय ठेके और 8 लाख रुपये के फोटो-वीडियोग्राफी टेंडर को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। नगर निगम से पूरी निविदा प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। ऐतिहासिक मेला गुघाल के आयोजन को लेकर नगर निगम के 3.30 करोड़ रुपये के बजट और विभिन्न कार्यों के ठेकों की प्रक्रिया पर सवाल गहराते जा रहे हैं। खास तौर पर फोटो-वीडियोग्राफी, क्रिएटिव और सोशल मीडिया मैनेजमेंट के नाम पर दिए गए 8 लाख रुपये के टेंडर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि इस काम के लिए पारदर्शी और व्यापक प्रतिस्पर्धा वाली प्रक्रिया अपनाने के बजाय एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाने का रास्ता तैयार किया गया। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि के लिए पूरी टेंडर फाइल और तकनीकी मूल्यांकन सामने आना जरूरी है। नगर निगम बोर्ड द्वारा मेला गुघाल वर्ष 2026-27 के लिए 3 करोड़ 30 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किए जाने की बात सामने आई है। बताया गया है कि मेले से संबंधित ठेका तीन वर्ष के लिए दिया गया है और इसमें प्रत्येक वर्ष पांच प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान है। पार्किंग, लाइट, टेंट समेत मेले की कई प्रमुख व्यवस्थाएं इसी ठेका व्यवस्था के दायरे में बताई जा रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि एक ही व्यक्ति अथवा ठेकेदार को लंबे समय तक काम मिलने से क्या व्यवस्थाओं पर उसका प्रभाव बढ़ गया है और क्या इससे मनमानी की स्थिति पैदा होने की आशंका नहीं बढ़ती? लेकिन इन सभी सवालों के बीच फोटो एवं वीडियोग्राफी का 8 लाख रुपये का टेंडर सबसे ज्यादा चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार फोटो एवं वीडियोग्राफी, क्रिएटिव और सोशल मीडिया मैनेजमेंट के लिए 8 लाख रुपये का कार्य निर्धारित किया गया। आरोप है कि इस काम को लेकर सहारनपुर के अन्य पत्रकारों, मीडिया संस्थानों और स्थानीय इनफ्लुएंसरों को समान रूप से जानकारी नहीं दी गई और कथित तौर पर पूरी प्रक्रिया सीमित दायरे में रखकर एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाया गया। सवाल यह है कि यदि नगर निगम को मेले के प्रचार-प्रसार के लिए किसी मीडिया पार्टनर या इनफ्लुएंसर की आवश्यकता थी तो इसकी सार्वजनिक जानकारी क्यों नहीं दी गई? सहारनपुर के पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को इसकी सूचना किस माध्यम से दी गई? कितने लोगों ने इसमें रुचि दिखाई? कितने आवेदन प्राप्त हुए? तकनीकी रूप से कौन-कौन पात्र पाया गया और वित्तीय बोली में कौन एल-1 रहा? यदि केवल दो बोलीदाता सामने आए तो यह भी सार्वजनिक होना चाहिए कि अन्य संभावित एजेंसियों तक निविदा की जानकारी किस तरह पहुंचाई गई। आरोप यह भी है कि फोटो-वीडियोग्राफी का यह काम एक व्यक्ति को अनावश्यक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से कराया गया और टेंडर की प्रक्रिया को उसी के अनुकूल बनाया गया। यदि यह आरोप गलत है तो नगर निगम को टेंडर की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए। टेंडर नोटिस, शर्तें, आवेदन करने वालों की सूची, तकनीकी मूल्यांकन, वित्तीय बोली और कार्यादेश सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रक्रिया वास्तव में कितनी पारदर्शी रही। सवाल केवल 8 लाख रुपये के टेंडर का नहीं है। यदि मेले के प्रचार-प्रसार के लिए 8 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं तो नगर निगम को यह भी बताना चाहिए कि इस खर्च से उसे क्या परिणाम प्राप्त होने की उम्मीद है। कितने फोटो, वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट, प्रचार अभियान और अन्य सेवाएं इस राशि में शामिल हैं और कार्य की निगरानी कौन करेगा? क्या इसके लिए कोई लक्ष्य और भुगतान की शर्तें तय की गई हैं? इसके अलावा मेला गुघाल से जुड़े अन्य कार्यों की निविदाओं को लेकर भी पारदर्शिता की मांग उठ रही है। सीसीटीवी और एलईडी से संबंधित कार्य में तीन बोलीदाताओं के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में प्रत्येक कार्य के लिए अपनाई गई प्रक्रिया और अंतिम चयन का आधार सार्वजनिक किया जाना जरूरी है। मांग की जा रही है कि नगर निगम मेला गुघाल से संबंधित हर टेंडर का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक करे। इसमें टेंडर जारी होने की तारीख, आवेदन की अंतिम तारीख, सभी बोलीदाताओं के नाम, तकनीकी पात्रता, वित्तीय बोली, एल-1 फर्म, कार्यादेश, अनुबंध की शर्तें, ठेके की राशि और अब तक किए गए भुगतान का पूरा विवरण शामिल किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि जिन फर्मों या व्यक्तियों को मेले के कार्य दिए गए हैं, उनका नगर निगम के किसी जनप्रतिनिधि अथवा अधिकारी से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध तो नहीं है। यदि कोई संबंध नहीं है तो दस्तावेजों के माध्यम से स्थिति साफ की जा सकती है और यदि कोई संबंध है तो हितों के टकराव से जुड़े नियमों के तहत अपनाई गई प्रक्रिया भी सार्वजनिक होनी चाहिए। सार्वजनिक धन से आयोजित होने वाले मेले में “किसे काम मिला” से ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि “किस प्रक्रिया से मिला।” खासकर 8 लाख रुपये के फोटो-वीडियोग्राफी टेंडर में यदि प्रतिस्पर्धा सीमित रही या संभावित इच्छुक लोगों को जानकारी ही नहीं मिली तो यह गंभीर पारदर्शिता का सवाल बनता है। इसका जवाब नगर निगम को दस्तावेजों के साथ देना चाहिए। फिलहाल किसी व्यक्ति या फर्म को नियमविरुद्ध लाभ पहुंचाने का अंतिम निष्कर्ष टेंडर रिकॉर्ड की पूरी जांच के बिना नहीं निकाला जा सकता। लेकिन एक व्यक्ति को लाभ पहुंचाने और प्रक्रिया गलत तरीके से अपनाए जाने के आरोपों ने इस टेंडर को सवालों के घेरे में ला दिया है। नगर निगम यदि प्रक्रिया सही होने का दावा करता है तो फोटो-वीडियोग्राफी के 8 लाख रुपये के टेंडर की पूरी फाइल सार्वजनिक कर इन सवालों का जवाब दे सकता है।

सूत्रों का यहां तक कहना है कि मेला गुघाल के फोटो-वीडियोग्राफी कार्य को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह भी आरोप सामने आया है कि कांवड़ यात्रा के दौरान भी इसी व्यक्ति को करीब 4 लाख रुपये में मीडिया, फोटो एवं वीडियोग्राफी का कार्य दिया गया था। आरोप है कि वहां भी कार्य आवंटन की प्रक्रिया को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नगर निगम की अलग-अलग आयोजनों की व्यवस्थाओं में बार-बार इसी व्यक्ति को काम मिलने के पीछे क्या वजह है? आखिर नगर निगम और संबंधित व्यक्ति के बीच ऐसा क्या संबंध या विशेष भरोसा है, जिसके चलते उसे लगातार काम मिलने के आरोप सामने आ रहे हैं। नगर निगम को दोनों कार्यों की निविदा प्रक्रिया, पात्रता, अन्य बोलीदाताओं और कार्यादेश का पूरा विवरण सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अब निगाह इस बात पर है कि नगर निगम 3.30 करोड़ रुपये के मेला बजट के साथ-साथ खास तौर पर फोटो-वीडियोग्राफी टेंडर से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करता है या नहीं।

 

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