Saharanpur News: हाईकोर्ट के हुक्का बार फैसले के बाद सहारनपुर में कार्रवाई पर नजर

हुक्का बार को लेकर हाईकोर्ट के फैसले के बाद सहारनपुर में संचालित बताए जा रहे हुक्का बारों पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

शहरी चौपाल ब्यूरो

सहारनपुर। उत्तर प्रदेश में हुक्का बार को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के सख्त फैसले के बाद अब सहारनपुर में संचालित हो रहे हुक्का बार को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि रेस्टोरेंट, कैफे या अन्य सार्वजनिक स्थानों में बनाए गए निर्धारित स्मोकिंग एरिया में भी ग्राहकों को हुक्का उपलब्ध कराना अथवा हुक्का से संबंधित सेवा देना अनुमन्य नहीं है। अदालत ने हुक्का बार से जुड़ी 80 याचिकाएं खारिज करते हुए पुलिस की कार्रवाई की शक्तियों को भी स्पष्ट किया है।

अब सवाल यह है कि क्या हाईकोर्ट के इस फैसले का असर सहारनपुर में भी दिखाई देगा? शहर में लंबे समय से कई स्थानों पर रेस्टोरेंट, कैफे और अन्य प्रतिष्ठानों की आड़ में हुक्का परोसे जाने की शिकायतें और चर्चाएं सामने आती रही हैं। खास बात यह है कि कुछ प्रतिष्ठानों को लेकर स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठता रहा है कि वे पुलिस थानों और चौकियों से ज्यादा दूर नहीं हैं। ऐसे में आम लोगों के बीच सवाल है कि यदि पुलिस-प्रशासन की नजर के सामने ऐसे प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं तो अब हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद इनके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह साफ किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंध के सीमित अपवाद के तौर पर निर्धारित स्मोकिंग एरिया मौजूद हो सकता है, लेकिन वहां किसी प्रकार की सेवा उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। अदालत के अनुसार हुक्का तैयार करना, उसमें तंबाकू भरना, अंगारे लगाना, ग्राहक तक पहुंचाना अथवा अंगारे बदलना भी सेवा के दायरे में आता है। यानी केवल यह कह देने से कि ग्राहक स्वयं हुक्का इस्तेमाल कर रहा है, प्रतिष्ठान संचालक जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता।

अदालत ने हुक्का संचालकों की उस दलील को भी स्वीकार नहीं किया जिसमें तैयार हुक्का ग्राहक को देकर उसके स्वयं इस्तेमाल करने को सेवा के बजाय उपकरण किराये पर देने के रूप में देखने की बात कही गई थी। इसके साथ ही न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा विभाग या नगर निकाय हुक्का बार चलाने के लिए अलग लाइसेंस जारी करने के अधिकार में नहीं हैं। पुलिस को प्रतिबंधों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए तलाशी, जब्ती और दंडात्मक कार्रवाई का अधिकार है।

ऐसे में सहारनपुर पुलिस के सामने अब सीधे तौर पर कार्रवाई का सवाल है। क्या शहर में संचालित हुक्का बारों की सूची तैयार कर उनकी जांच की जाएगी? क्या रेस्टोरेंट और कैफे की आड़ में हुक्का परोसने वालों के खिलाफ अभियान चलेगा? क्या थाना और चौकी के आसपास संचालित बताए जा रहे प्रतिष्ठानों की भी जांच होगी? और सबसे बड़ा सवाल यह कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी यदि कहीं हुक्का सेवा जारी मिली तो संबंधित संचालकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी?

हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद अब केवल लाइसेंस या स्मोकिंग जोन का हवाला देकर हुक्का सेवा जारी रखने की गुंजाइश पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर गैर-धूम्रपान करने वाले लोगों के स्वच्छ हवा में सांस लेने के अधिकार को भी महत्वपूर्ण माना है। फैसले की प्रति मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को आवश्यक अनुपालन के लिए भेजने का निर्देश दिया गया है।

अब निगाहें सहारनपुर पुलिस और प्रशासन पर हैं। देखना यह है कि हाईकोर्ट के इस स्पष्ट फैसले के बाद सहारनपुर में भी हुक्का बार पर शिकंजा कसता है या फिर कार्रवाई केवल कागजों और आदेशों तक सीमित रह जाती है।

 

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