शहरी चौपाल ब्यूरो
उत्तर प्रदेश । खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रदेश में मिलावटी दूध और दुग्ध उत्पादों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए जनहित में कड़ी कार्रवाई की गई है। 28 अप्रैल 2026 को आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, लखनऊ के निर्देश पर जनपद बुलन्दशहर और सहारनपुर में एक साथ प्रदेश स्तरीय 49 विशेष प्रवर्तन टीमों का गठन कर बड़े पैमाने पर आकस्मिक निरीक्षण किया गया। इस अभियान का उद्देश्य आम जनता को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना तथा मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना रहा।
जानकारी के अनुसार, इन टीमों द्वारा दोनों जनपदों के प्रमुख दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद निर्माण इकाइयों तथा दुग्ध अवशीतन केंद्रों का गहन निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कुल 47 प्रतिष्ठान संचालित पाए गए, जहां लाइसेंस की स्थिति, साफ-सफाई, अभिलेखों का रख-रखाव, पाश्चराइजेशन प्रक्रिया, शीत भंडारण व्यवस्था तथा दुग्ध क्रय से जुड़े रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की गई। साथ ही अपमिश्रकों की संभावित उपस्थिति पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

जनपद बुलन्दशहर में इस अभियान के दौरान 35 इकाइयों से कुल 112 नमूने एकत्र किए गए, जबकि जनपद सहारनपुर में 12 इकाइयों से 21 नमूने लिए गए। इन नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है, जिनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस व्यापक जांच के दौरान बड़ी मात्रा में संदिग्ध उत्पाद भी जब्त किए गए।
कार्रवाई के दौरान बुलन्दशहर में लगभग 503.5 मीट्रिक टन दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 5.75 करोड़ रुपये आंकी गई है। वहीं सहारनपुर में 25 किलोग्राम क्षमता के 782 बैग स्किम्ड मिल्क पाउडर जब्त किए गए, जिनका अनुमानित मूल्य लगभग 94 लाख रुपये बताया गया है। यह जब्ती दर्शाती है कि मिलावट और अनियमितताओं का कारोबार बड़े स्तर पर संचालित हो रहा था, जिस पर अब प्रशासन ने सख्त शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं भी सामने आईं। कई इकाइयों में साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई, जबकि कुछ स्थानों पर दुग्ध क्रय से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। इसके अलावा पुराने खाद्य पदार्थों को नई तिथि के साथ रीपैक कर बाजार में बेचने के मामले भी सामने आए, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है। इन अनियमितताओं को देखते हुए 6 राज्य स्तरीय इकाइयों के लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इसके साथ ही 3 केंद्रीय स्तर की इकाइयों के लाइसेंस निलंबन की संस्तुति भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण को भेजी गई है। वहीं 20 राज्य स्तरीय इकाइयों को सुधार सूचना जारी करते हुए उन्हें निर्धारित समय के भीतर अपनी व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा में सुधार न करने पर और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले में विभागीय स्तर पर भी सख्त कदम उठाए गए हैं। कदाचार की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जनपद सहारनपुर के सहायक आयुक्त (खाद्य) ग्रेड-2 मनोज कुमार वर्मा और मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी धनंजय शुक्ला को मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है, जबकि खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुमनपाल को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि सरकार न केवल बाहरी मिलावटखोरों पर बल्कि विभागीय लापरवाही पर भी सख्त रुख अपना रही है।
प्रदेश सरकार ने इस अभियान के माध्यम से यह स्पष्टखाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रदेश में मिलावटी दूध और दुग्ध उत्पादों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए जनहित में कड़ी कार्रवाई की गई है। 28 अप्रैल 2026 को आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, लखनऊ के निर्देश पर जनपद बुलन्दशहर और सहारनपुर में एक साथ प्रदेश स्तरीय 49 विशेष प्रवर्तन टीमों का गठन कर बड़े पैमाने पर आकस्मिक निरीक्षण किया गया। इस अभियान का उद्देश्य आम जनता को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना तथा मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना रहा।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इन टीमों द्वारा दोनों जनपदों के प्रमुख दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद निर्माण इकाइयों तथा दुग्ध अवशीतन केंद्रों का गहन निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान कुल 47 प्रतिष्ठान संचालित पाए गए, जहां लाइसेंस की स्थिति, साफ-सफाई, अभिलेखों का रख-रखाव, पाश्चराइजेशन प्रक्रिया, शीत भंडारण व्यवस्था तथा दुग्ध क्रय से जुड़े रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की गई। साथ ही अपमिश्रकों की संभावित उपस्थिति पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
जनपद बुलन्दशहर में इस अभियान के दौरान 35 इकाइयों से कुल 112 नमूने एकत्र किए गए, जबकि जनपद सहारनपुर में 12 इकाइयों से 21 नमूने लिए गए। इन नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है, जिनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस व्यापक जांच के दौरान बड़ी मात्रा में संदिग्ध उत्पाद भी जब्त किए गए।
कार्रवाई के दौरान बुलन्दशहर में लगभग 503.5 मीट्रिक टन दुग्ध एवं दुग्ध उत्पाद जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 5.75 करोड़ रुपये आंकी गई है। वहीं सहारनपुर में 25 किलोग्राम क्षमता के 782 बैग स्किम्ड मिल्क पाउडर जब्त किए गए, जिनका अनुमानित मूल्य लगभग 94 लाख रुपये बताया गया है। यह जब्ती दर्शाती है कि मिलावट और अनियमितताओं का कारोबार बड़े स्तर पर संचालित हो रहा था, जिस पर अब प्रशासन ने सख्त शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं भी सामने आईं। कई इकाइयों में साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई, जबकि कुछ स्थानों पर दुग्ध क्रय से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। इसके अलावा पुराने खाद्य पदार्थों को नई तिथि के साथ रीपैक कर बाजार में बेचने के मामले भी सामने आए, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है। इन अनियमितताओं को देखते हुए 6 राज्य स्तरीय इकाइयों के लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इसके साथ ही 3 केंद्रीय स्तर की इकाइयों के लाइसेंस निलंबन की संस्तुति भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण को भेजी गई है। वहीं 20 राज्य स्तरीय इकाइयों को सुधार सूचना जारी करते हुए उन्हें निर्धारित समय के भीतर अपनी व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा में सुधार न करने पर और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले में विभागीय स्तर पर भी सख्त कदम उठाए गए हैं। कदाचार की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जनपद सहारनपुर के सहायक आयुक्त (खाद्य) ग्रेड-2 मनोज कुमार वर्मा और मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी धनंजय शुक्ला को मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है, जबकि खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुमनपाल को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि सरकार न केवल बाहरी मिलावटखोरों पर बल्कि विभागीय लापरवाही पर भी सख्त रुख अपना रही है।
प्रदेश सरकार ने इस अभियान के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आमजन के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान जारी रहेगा और दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी। साथ ही आम लोगों से भी अपील की गई है कि वे संदिग्ध खाद्य उत्पादों की सूचना संबंधित विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
यह व्यापक अभियान प्रदेश में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।








