शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर, । अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस की पूर्व संध्या पर सहारनपुर में श्रमिकों के अधिकारों, उनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान और वर्तमान चुनौतियों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। रेलवे रोड स्थित उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के जिला मुख्यालय कार्यालय पर हुई इस बैठक में व्यापार जगत के पदाधिकारियों ने श्रमिक कल्याण के मुद्दों पर गंभीर मंथन करते हुए सरकार और उद्योग जगत से अधिक संवेदनशील रवैया अपनाने की अपील की।

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बैठक को संबोधित करते हुए व्यापार मंडल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष शीतल टण्डन ने श्रमिकों को किसी भी उद्योग और व्यापार की रीढ़ बताते हुए कहा कि उनके बिना आर्थिक गतिविधियों की कल्पना करना असंभव है। उन्होंने कहा कि श्रमिक वर्ग को उनके अधिकारों से वंचित रखना न केवल अन्याय है, बल्कि यह देश के आर्थिक विकास में भी बाधा उत्पन्न करता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार, उद्योग और व्यापार जगत को मिलकर ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जिसमें श्रमिकों को सम्मान, सुरक्षा और उचित पारिश्रमिक मिल सके।
शीतल टण्डन ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अभी भी बड़ी संख्या में श्रमिकों तक नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने हाल ही में नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब श्रमिकों की समस्याओं को समय पर नहीं सुना जाता, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर हो जाते हैं। यह स्थिति प्रशासन और समाज दोनों के लिए चिंताजनक है।

बैठक में श्रमिकों की सामाजिक स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि आज भी कई परिवार ऐसे हैं जिनकी पीढ़ियां मजदूरी करते हुए बीत गईं, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया। यह एक गंभीर सामाजिक चुनौती है, जिस पर समग्र दृष्टिकोण के साथ कार्य करने की आवश्यकता है।
बाल श्रम के मुद्दे को विशेष रूप से उठाते हुए शीतल टण्डन ने कहा कि यह समस्या आज भी विभिन्न क्षेत्रों में व्याप्त है, खासकर ईंट-भट्टों और असंगठित क्षेत्र में। उन्होंने कहा कि बच्चों से काम कराना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह उनके भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है। इसके लिए सख्त कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है, ताकि समाज के हर वर्ग में इस विषय को लेकर संवेदनशीलता बढ़े।
बैठक में रिक्शा चालकों की स्थिति पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि आज भी कई लोग मजबूरी में एक व्यक्ति का भार खींचने का काम कर रहे हैं, जो सामाजिक दृष्टि से चिंताजनक है। उन्होंने इस वर्ग के लिए विशेष योजनाएं बनाने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे उन्हें सम्मानजनक आजीविका मिल सके और उनका जीवन स्तर बेहतर हो सके।
हालांकि बैठक में यह भी स्वीकार किया गया कि सरकार द्वारा श्रमिकों के कल्याण के लिए कई सकारात्मक कदम उठाए गए हैं। इनमें निःशुल्क साइकिल वितरण, दुर्घटना बीमा, बेटियों के जन्म और विवाह पर आर्थिक सहायता तथा सौर ऊर्जा संयंत्रों के लिए अनुदान जैसी योजनाएं शामिल हैं। पदाधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में श्रम विभाग के अधिकारी प्रवीन चन्द दत्त से भी संवाद किया गया है, ताकि इन योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक श्रमिकों तक पहुंचाया जा सके।
बैठक के दौरान मजदूर दिवस के इतिहास पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि 1 मई 1886 को Haymarket Affair के दौरान अमेरिका के शिकागो में श्रमिकों ने काम के लंबे और अनियंत्रित घंटों के खिलाफ आंदोलन किया था, जिसमें कई मजदूरों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। इसी घटना की स्मृति में हर वर्ष 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस मनाया जाता है। भारत में पहली बार वर्ष 1923 में Chennai में मजदूर दिवस मनाया गया था।

बैठक के अंत में सभी उपस्थित पदाधिकारियों और व्यापारियों ने श्रमिकों के उज्ज्वल भविष्य, सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। साथ ही सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन में वृद्धि के हालिया निर्णय का स्वागत करते हुए इसे श्रमिकों के हित में सकारात्मक कदम बताया गया।
इस अवसर पर जिला महामंत्री रमेश अरोड़ा, जिला कोषाध्यक्ष कर्नल संजय मिड्ढा, मेजर एस.के. सूरी, राजीव अग्रवाल, पवन गोयल, अभिषेक भाटिया, रमेश डावर, संजय महेश्वरी, संदीप सिंघल, बलदेव राज खुंगर, अशोक मलिक, भोपाल सिंह सैनी, संजीव सचदेवा, मुरली खन्ना सहित अनेक व्यापारी प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक में सभी ने एक स्वर में श्रमिकों के हितों की रक्षा और उनके कल्याण के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प लिया।








