शामली में खोखरी नदी जीर्णोद्धार अभियान तेज, दो माह में पूरा होगा कार्य: डीएम आलोक यादव

शामली में जिलाधिकारी आलोक यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में खोखरी नदी के जीर्णोद्धार को प्राथमिकता देते हुए दो माह में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए। पर्यावरण, जल संरक्षण और अवैध खनन पर भी सख्त रुख अपनाया गया।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

शामली। जनपद में नदियों के संरक्षण, पर्यावरण सुधार और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी आलोक यादव की अध्यक्षता में जिला गंगा समिति, जिला पर्यावरण समिति और जिला वृक्षारोपण समिति की संयुक्त बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों को समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

बैठक में जनपद की नदियों की वर्तमान स्थिति, प्रदूषण नियंत्रण, अवैध खनन, जल गुणवत्ता, आर्द्रभूमि संरक्षण और वृक्षारोपण योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि नदियों का संरक्षण प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने ड्रेनेज खंड को निर्देशित किया कि नदियों में जमी गाद निकालने, जल प्रवाह को सुचारू बनाने और सफाई कार्यों के लिए शीघ्र विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत की जाए, ताकि कार्यों को तेजी से धरातल पर उतारा जा सके।

बैठक में विशेष रूप से खोखरी नदी के जीर्णोद्धार का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी का पुनरुद्धार कार्य आगामी दो माह के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए। इसके तहत नदी की सफाई, गाद निकासी, जल निकासी मार्गों का सुधार, अतिक्रमण हटाना और प्राकृतिक जल प्रवाह को बहाल करना प्राथमिकता में रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्य केवल औपचारिकता नहीं बल्कि जनपद के पर्यावरणीय संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नदी संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता रमन कांत को भी बैठक में आमंत्रित किया गया। जिलाधिकारी ने उनके अनुभवों और सुझावों का लाभ उठाने के लिए ग्रामीण जलापूर्ति विभाग को समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए, ताकि कार्यों में व्यावहारिकता और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके।

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने नदी क्षेत्रों में हो रहे अतिक्रमण पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि नदी की भूमि और जलमार्गों से अवैध कब्जों को तत्काल हटाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नदियों के प्राकृतिक स्वरूप के साथ किसी भी प्रकार का छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी।

इसके अतिरिक्त जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देश दिए गए कि नदी क्षेत्र से जुड़ी ग्राम पंचायतों में जल निकासी, नालों और जल प्रवाह की विस्तृत मैपिंग कर तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों से नदी में पहुंचने वाले गंदे पानी की समस्या का स्थायी समाधान किया जा सके।

खनन विभाग को निर्देशित किया गया कि अवैध खनन की किसी भी सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, जबकि प्रदूषण नियंत्रण विभाग को प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ अभियान चलाने और पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त जुर्माना लगाने के निर्देश दिए गए। जिन इकाइयों पर पहले से जुर्माना लगाया जा चुका है, उनसे शीघ्र वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

नगर निकायों को आदेशित किया गया कि वे नियमित रूप से जल गुणवत्ता की जांच कर उसकी रिपोर्ट प्रशासन को उपलब्ध कराएं, ताकि पेयजल और नदी जल की गुणवत्ता पर सतत निगरानी रखी जा सके। बैठक में मामौर झील को जिला स्तर पर आर्द्रभूमि के रूप में चिह्नित कर अधिसूचना के लिए प्रस्ताव भेजने के निर्देश भी दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि आर्द्रभूमियों का संरक्षण जैव विविधता, भूजल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि वे सौंपे गए कार्यों को गंभीरता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पूरा करें। उन्होंने कहा कि यदि सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करेंगे तो जनपद में नदियों का संरक्षण, पर्यावरण सुधार और जल संसाधनों का समुचित विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार तिवारी, डीएफओ जगदेव सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे और सभी ने अपने-अपने विभागीय कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।

trfgcvkj.blkjhgfd

Leave a Comment

और पढ़ें

Horoscope

Weather

और पढ़ें
error: Content is protected !!

राज्य