नागल में मंदिर का रास्ता बंद होने पर भाकियू टिकैत का विरोध, हाईवे निर्माण रोका, आश्वासन पर फिर शुरू

सहारनपुर के नागल में शिव मंदिर का रास्ता बंद होने पर भाकियू टिकैत कार्यकर्ताओं ने हाईवे निर्माण कार्य रुकवाया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद काम दोबारा शुरू हुआ, किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

नागल (सहारनपुर)। निर्माणाधीन हरिद्वार-हल्गोवा नेशनल हाईवे पर गांव बसेड़ा के निकट स्थित प्राचीन शिव मंदिर के रास्ते को अवरुद्ध किए जाने के विरोध में बुधवार को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। आक्रोशित किसानों और कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर हाईवे अथॉरिटी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निर्माण कार्य को रुकवा दिया। करीब एक घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के चलते निर्माण कार्य पूरी तरह बाधित रहा, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव बसेड़ा के समीप स्थित शिव मंदिर तक जाने वाला रास्ता हाईवे निर्माण के दौरान बंद कर दिया गया था, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना करने वाले ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। इसके चलते भाकियू टिकैत के कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए और उन्होंने मौके पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

प्रदर्शन के दौरान भाकियू टिकैत के प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी राजपाल सिंह ने कहा कि हाईवे निर्माण के नाम पर किसानों और ग्रामीणों के हितों की अनदेखी की जा रही है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अथॉरिटी के अधिकारी मनमानी तरीके से कार्य कर रहे हैं और किसानों का शोषण किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो संगठन बड़े स्तर पर पंचायत आयोजित कर आंदोलन को और तेज करेगा।

विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलते ही हाईवे अथॉरिटी के अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज चौधरी, अवर अभियंता उस्मान मलिक तथा ठेकेदार देवराज चौधरी ने किसानों और कार्यकर्ताओं से बातचीत की। अधिकारियों ने शिव मंदिर के रास्ते को तत्काल बहाल करने का आश्वासन दिया, जिसके बाद कार्यकर्ताओं ने अपना विरोध समाप्त किया और निर्माण कार्य को दोबारा शुरू कराया गया।

इस दौरान अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया और संबंधित टीम को निर्देश दिए कि मंदिर के रास्ते को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। किसानों ने भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में इस तरह की समस्याएं दोबारा उत्पन्न हुईं तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

घटनास्थल पर अभिमन्यु वालिया, काला उर्फ बिजेंद्र, राकेश त्यागी, सगीर अहमद, निखिल त्यागी, रामकुमार, शंकर त्यागी, अनिल त्यागी, सुनील कुमार, मोहित कुमार सहित बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में मंदिर के रास्ते को सुरक्षित और सुगम बनाए रखने की मांग की।

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विकास कार्यों के दौरान स्थानीय जरूरतों और धार्मिक स्थलों की सुविधाओं का ध्यान किस हद तक रखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि विकास और जनसुविधाओं के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी वर्ग को असुविधा का सामना न करना पड़े।

 

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