सहारनपुर में सफाई व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों का प्रदर्शन, संयुक्त मंडलायुक्त को सौंपा ज्ञापन

सहारनपुर में सफाई कर्मचारियों ने सफाई व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में मंडलायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन कर संयुक्त मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने निजीकरण से शोषण और भ्रष्टाचार बढ़ने का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। नगर निगम की सफाई व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपे जाने की चर्चाओं के बीच शुक्रवार को सहारनपुर में सफाई कर्मचारियों का आक्रोश खुलकर सामने आया। अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारियों ने मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और सफाई व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में नारेबाजी करते हुए संयुक्त मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया को वापस नहीं लिया गया तो भविष्य में बड़ा आंदोलन और हड़ताल की जाएगी।

प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों में भारी रोष देखने को मिला। हाथों में बैनर और नारे लिखी तख्तियां लेकर पहुंचे कर्मचारियों ने नगर निगम प्रशासन और शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सफाई व्यवस्था को निजी कंपनियों को सौंपने का निर्णय कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है और इससे हजारों कर्मचारियों का भविष्य प्रभावित होगा।

अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ के नेता सोनी आजाद वाल्मीकि ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि सफाई व्यवस्था के निजीकरण से कर्मचारियों का शोषण बढ़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी कंपनियों के माध्यम से कार्य कराए जाने पर रिश्वतखोरी और कमीशनखोरी को बढ़ावा मिलेगा तथा कर्मचारियों के अधिकारों का हनन होगा। उन्होंने कहा कि वर्षों से सफाई कर्मचारी नगर निगम के साथ मिलकर शहर की सफाई व्यवस्था संभाल रहे हैं, लेकिन अब उन्हें दरकिनार कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में नगर निगम लगभग 45 करोड़ रुपये में सफाई व्यवस्था का संचालन कर रहा है, जबकि निजीकरण के बाद इसी कार्य को लगभग 78 करोड़ रुपये में कराने की तैयारी की जा रही है। इससे नगर निगम और शासन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा तथा जनता के पैसे का दुरुपयोग होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग निजी स्वार्थ के लिए कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर रहे हैं, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कर्मचारियों ने यह भी कहा कि निजी कंपनियों के आने से स्थायी कर्मचारियों की स्थिति कमजोर होगी और भविष्य में नौकरी की सुरक्षा पर भी संकट खड़ा हो सकता है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सफाई व्यवस्था जैसी महत्वपूर्ण सेवा को निजी हाथों में सौंपना जनहित के खिलाफ है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और निजीकरण का निर्णय तुरंत वापस लिया जाए।

संयुक्त मंडलायुक्त भानुप्रसाद यादव को सौंपे गए ज्ञापन में कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में नगर निगम स्तर पर कार्य बहिष्कार और हड़ताल जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों ने कहा कि सफाई कर्मचारी कोरोना काल सहित हर कठिन परिस्थिति में शहर की सेवा करते रहे हैं। बावजूद इसके अब उनके भविष्य को असुरक्षित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नगर निगम को कर्मचारियों की सुविधाओं और संसाधनों को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए, न कि निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए योजनाएं बनानी चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान धीरज आजाद, रामकुमार, गौरव प्रजापति, दीपक कुमार, अनुज वाल्मीकि, अमन, कारण आदिवाल, दीपक बिरला, मनमोहन सूद, प्रमोद सुधा, रिंकू बिरला, अशोकेश्वर, लक्ष्मण जी, आकाश बिरला और कमल चंचल सहित बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी मौजूद रहे।

सहारनपुर में सफाई व्यवस्था के निजीकरण को लेकर शुरू हुआ यह विरोध अब बड़ा रूप लेता दिखाई दे रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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