सहारनपुर में महाराणा प्रताप जयंती पर समरसता गोष्ठी आयोजित, युवाओं को दिए राष्ट्रभक्ति के संदेश

सहारनपुर के रविदास आश्रम चमारीखेड़ा में महाराणा प्रताप जयंती पर समरसता गोष्ठी आयोजित की गई। वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के त्याग, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को उनके आदर्श अपनाने का संदेश दिया।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। रविदास विद्वत सभा के तत्वावधान में शुक्रवार को रविदास आश्रम चमारीखेड़ा में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित समरसता गोष्ठी में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भाग लिया तथा महाराणा प्रताप के जीवन, संघर्ष, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक समरसता के संदेश पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाराणा प्रताप के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इसके बाद आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के त्याग, पराक्रम और स्वाभिमान को भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि उनका जीवन आज भी देशवासियों को प्रेरणा देता है।

सभा के संरक्षक ठाकुर सूर्यकांत सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक योद्धा ही नहीं बल्कि राष्ट्र सम्मान और आत्मगौरव के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों और अभावों के बावजूद महाराणा प्रताप ने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और मातृभूमि की रक्षा के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उनका जीवन त्याग, संघर्ष, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभक्ति का अनुपम उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को महाराणा प्रताप के आदर्शों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। समाज में बढ़ती वैचारिक चुनौतियों और सामाजिक विभाजन के दौर में महाराणा प्रताप का जीवन हमें एकता, साहस और स्वाभिमान का संदेश देता है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित और सामाजिक सद्भाव को सर्वोपरि मानकर कार्य करने का आह्वान किया।

गोष्ठी में अन्य वक्ताओं ने भी कहा कि महाराणा प्रताप का संघर्ष केवल मेवाड़ की रक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि वह भारतीय संस्कृति, अस्मिता और स्वतंत्रता की रक्षा का संघर्ष था। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि सच्चा नेतृत्व वही होता है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों और सिद्धांतों पर अडिग रहे।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने सामाजिक समरसता और भाईचारे को मजबूत बनाने का संकल्प भी लिया। वक्ताओं ने कहा कि समाज में आपसी सौहार्द और समानता की भावना को बढ़ावा देना ही महाराणा प्रताप को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महंत जगरामदास ने की, जबकि संचालन आचार्य सुंदर दास ने किया। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों ने महाराणा प्रताप के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के लिए सकारात्मक कार्य करने का संकल्प लिया।

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