सहारनपुर में 1857 के शहीदों को श्रद्धांजलि, शहीद स्मारक पर गूंजे देशभक्ति के नारे

सहारनपुर के लोहा बाजार स्थित शहीद स्मारक पर 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की 169वीं वर्षगांठ पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित हुआ। किरणजीत संधू सहित कई वक्ताओं ने शहीदों के बलिदान को याद करते हुए युवाओं को राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की 169वीं वर्षगांठ पर रविवार को लोहा बाजार स्थित शहीद स्मारक पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान “भारत माता की जय” और “देश के अमर शहीद अमर रहें” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। शहर के गणमान्य लोगों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों और विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने शहीदों को पुष्प अर्पित कर नमन किया। पुलिस गारद द्वारा अमर शहीदों को सशस्त्र सलामी भी दी गई।

नगर निगम के सहयोग से श्री ललिता-पन्ना स्वतंत्रता सेनानी स्मारक समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता शहीद-ए-आजम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी भगत सिंह के भतीजे किरणजीत संधू ने की, जबकि संचालन साहित्यकार डॉ. वीरेंद्र आज़म ने किया।

अपने संबोधन में किरणजीत संधू ने कहा कि जो कौमें अपने बुजुर्गों और शहीदों के बलिदान को भूल जाती हैं, उनका अस्तित्व समाप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों को यह पता था कि वे आजाद भारत नहीं देख पाएंगे, लेकिन फिर भी उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने युवाओं से शहीदों के संघर्ष और त्याग से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

पूर्व विधायक सुरेंद्र कपिल ने कहा कि क्रांति दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति और बलिदान की प्रेरणा देने का अवसर है। उन्होंने ऋषिकुल के छात्र जगदीश वत्स के बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देशभक्ति की भावना समाज को मजबूत बनाती है।

समिति अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक जयनाथ शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन और शहीदों के संघर्ष को शिक्षा का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजादी हमारे पूर्वजों की सबसे बड़ी धरोहर है और इसे सुरक्षित रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

भाजपा नेता सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि स्कूलों के पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा के साथ-साथ स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन संघर्ष को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि बच्चे बचपन से ही राष्ट्रभक्ति की भावना से जुड़ सकें।

समाजसेवी महेंद्र सचदेवा ने कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों की अनुपस्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए समय निकालना प्रत्येक अधिकारी और जनप्रतिनिधि का नैतिक दायित्व होना चाहिए।

साहित्यकार डॉ. वीरेंद्र आज़म ने सहारनपुर के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि लोहा बाजार और चौकी सराय क्षेत्र में पीपल के पेड़ों पर 1857 के क्रांतिकारियों को फांसी दी गई थी। उन्होंने सहारनपुर में क्रांतिकारियों की बम फैक्ट्री पकड़े जाने सहित कई ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र किया।

कार्यक्रम में आशुतोष सहगल, नरेंद्र बंसल, संदीप सैनी, विक्रम सिंह सढ़ौली, विनय जिंदल और थाना मंडी प्रभारी सतपाल भाटी सहित अनेक गणमान्य लोगों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर इस्लामिया इंडस्ट्रियल मुस्लिम गर्ल्स इंटर कॉलेज की छात्रा कुमारी कशिश अफजाल ने संस्कृत में राष्ट्रभक्ति गीत प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। वहीं जेबीएस हिंदू कन्या इंटर कॉलेज और श्री दिगंबर जैन कन्या इंटर कॉलेज की छात्राओं ने भी बड़ी संख्या में कार्यक्रम में भाग लिया।

 

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