शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता मनीष त्यागी ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा जनता को सोना न खरीदने और बचत करने की सलाह दिए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बयान देश की आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर संकेत देता है।
मनीष त्यागी ने अपने बयान में कहा कि देश की जनता पहले से ही बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक दबाव से परेशान है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री द्वारा लोगों को खर्च कम करने और बचत करने की सलाह देना यह दर्शाता है कि सरकार आर्थिक हालात को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पहले ही रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है और लगातार बढ़ती कीमतों ने मध्यम वर्ग तथा गरीब परिवारों की कमर तोड़ दी है।
उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले तक प्रधानमंत्री चुनावी सभाओं में विपक्ष पर लोगों का “मंगलसूत्र छीनने” जैसे आरोप लगाते थे, लेकिन अब वही जनता को सोना खरीदने से बचने की सलाह दे रहे हैं। मनीष त्यागी ने कहा कि सरकार के बयान और जमीनी हालात में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
मनीष त्यागी ने प्रधानमंत्री की कार्यशैली पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि जो सरकार और उसके शीर्ष नेता स्वयं बड़े-बड़े आयोजनों, प्रचार अभियानों और भारी सुरक्षा व्यवस्थाओं पर करोड़ों रुपये खर्च करते हैं, वही अब जनता को बचत का पाठ पढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम नागरिक पहले से ही अपने खर्चों में कटौती करने को मजबूर है और अब सरकार की ओर से इस प्रकार की अपील लोगों के मन में आर्थिक असुरक्षा की भावना पैदा कर रही है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि महंगाई इसी प्रकार बढ़ती रही तो आने वाले समय में सरकार जनता को कम खाने और कम खर्च करने की सलाह भी दे सकती है। उन्होंने कहा कि देश में रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं, छोटे व्यापारी परेशान हैं और आम लोगों की क्रय शक्ति लगातार घट रही है।
मनीष त्यागी ने यह भी दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में पहली बार ऐसी स्थिति देखने को मिली है जब बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय भारत से अधिक होने की चर्चा सामने आई। उन्होंने कहा कि यह देश की आर्थिक नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि उन्होंने इस विषय पर केंद्र सरकार से स्पष्ट स्थिति बताने की मांग भी की।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता जैसे मूल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि देश की जनता को वास्तविक आर्थिक स्थिति से अवगत कराया जाना चाहिए और सरकार को लोगों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और महंगाई नियंत्रण पर ध्यान देना चाहिए।
मनीष त्यागी ने कहा कि यदि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत है तो फिर सरकार को जनता से इस प्रकार की बचत संबंधी अपील करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को आम जनता की परेशानियों को समझते हुए राहत देने वाले कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने अंत में कहा कि देश का मध्यम वर्ग और गरीब तबका लगातार आर्थिक दबाव झेल रहा है और सरकार को केवल भाषणों के बजाय जमीनी स्तर पर राहत पहुंचाने वाली नीतियां लागू करनी चाहिए।








