सोमनाथ धाम में पहली बार तीन पीढ़ियों ने लगाया योग शिविर, पद्मश्री स्वामी भारत भूषण ने बताया ऐतिहासिक क्षण

सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण अमृत महोत्सव के अवसर पर पद्मश्री स्वामी भारत भूषण ने सोमनाथ धाम में पहली बार तीन पीढ़ियों के साथ योग शिविर आयोजित किया। योग गुरु ने इसे भगवान शिव और प्रधानमंत्री मोदी की दूरदृष्टि का आशीर्वाद बताया।

शहरी चौपाल ब्यूरो 

सहारनपुर। सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण के अमृत महोत्सव के अवसर पर आयोजित विशेष योग कार्यक्रम ने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जगत में नई ऊर्जा का संचार किया। अंतरराष्ट्रीय योग गुरु एवं पद्मश्री सम्मानित स्वामी भारत भूषण ने इस अवसर को अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताते हुए कहा कि यह योगिराज भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि का परिणाम है कि उन्हें सोमनाथ धाम के पावन प्रांगण में योग सेवा देने का अवसर प्राप्त हुआ।

योग गुरु स्वामी भारत भूषण ने कहा कि सहारनपुर की पावन भूमि, जिसे प्राचीन काल में शिवारण्यपुर कहा जाता था और जिसे भगवान शिव की ससुराल के रूप में जाना जाता है, वहीं से उनकी आध्यात्मिक यात्रा प्रारंभ हुई। उन्होंने हिमालय, ऋषिकेश, वाराणसी, उज्जैन, वेरावल और सोमनाथ जैसे शिव से जुड़े प्रमुख तीर्थ स्थलों पर योग की धारा प्रवाहित की है। उन्होंने कहा कि योग साधना के क्षेत्र में उन्हें पहला पद्मश्री सम्मान प्राप्त होना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि योग परंपरा के सम्मान का प्रतीक है।

स्वामी भारत भूषण ने बताया कि कुछ वर्ष पहले वेरावल में आयोजित योग शिविर के दौरान जब वे सोमनाथ मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे थे, तभी उनके मन में यह भाव जागृत हुआ था कि एक दिन इस दिव्य परिसर में योग शिविर आयोजित करना उनके जीवन का सौभाग्य बनेगा। उन्होंने कहा कि यह भगवान शिव की अनूठी कृपा ही है कि वह संकल्प साकार हुआ और भारत सरकार की ओर से उन्हें सोमनाथ धाम में योग कार्यक्रम आयोजित करने का निमंत्रण प्राप्त हुआ।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मोदी जी, जो सोमनाथ ट्रस्ट के चेयरमैन भी हैं, ने भारतीय संस्कृति, योग और आध्यात्मिक परंपराओं को वैश्विक पहचान दिलाने का कार्य किया है। उनके नेतृत्व में योग केवल भारत तक सीमित नहीं रहा बल्कि विश्वभर में भारतीय संस्कृति की पहचान बन चुका है।

इस ऐतिहासिक आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि सोमनाथ धाम के प्रांगण में पहली बार भारतयोग परंपरा की तीन पीढ़ियों ने एक साथ योग प्रशिक्षण और योग सेवा प्रदान की। स्वामी भारत भूषण के साथ उनकी अगली पीढ़ी आचार्य प्रतिष्ठा और तीसरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रही देवी प्रत्यक्षा भी इस योग शिविर का हिस्सा बनीं। इसे योग परंपरा के संरक्षण और नई पीढ़ी तक उसके हस्तांतरण का प्रेरणादायक उदाहरण माना जा रहा है।

योग गुरु ने भावुक होते हुए कहा कि यह उनके लिए अत्यंत गौरव और आत्मिक संतोष का विषय है कि उन्हें योग विद्या के प्रणेता भगवान शिव से जुड़े प्रमुख स्थलों के साथ-साथ योगेश्वर भगवान कृष्ण से संबंधित मथुरा, वृंदावन, हरियाणा, द्वारका, भालका तीर्थ और प्रभास क्षेत्र में भी योग शिविर आयोजित करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि इन पवित्र स्थलों पर योग सेवा देकर उनका मानव जीवन धन्य हो गया।

स्वामी भारत भूषण ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, आत्मिक संतुलन और वैश्विक मानव कल्याण का माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भारतीय योग परंपरा को अपना रही है और भारत पुनः विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

सोमनाथ धाम में आयोजित इस योग शिविर को श्रद्धालुओं और योग साधकों ने अत्यंत प्रेरणादायक बताया। कार्यक्रम के दौरान योग, ध्यान और आध्यात्मिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला। योग शिविर में शामिल लोगों ने इसे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति देने वाला अनुभव बताया।

सोमनाथ पुनर्निर्माण अमृत महोत्सव के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति, योग परंपरा और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।

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