मनोज मिड्ढा
सहारनपुर। जनपद के कस्बा गागलहेड़ी में 18 मई को आयोजित होने जा रहे कांग्रेस के कार्यकर्ता सम्मेलन एवं सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम को लेकर जिले की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। इस कार्यक्रम को कांग्रेस का बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है, जिस पर सभी राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हुई हैं। कार्यक्रम में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, सांसद इमरान मसूद समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा तेज है कि कार्यक्रम के दौरान कई बड़े राजनीतिक चेहरे कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। सूत्रों के अनुसार पूर्व विधायक मसूद अख्तर, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष हाजी चौधरी इरशाद, बसपा नेता रईस मलिक तथा एमएलसी शाहनवाज खान के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाएं जोरों पर हैं। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सम्मेलन का उद्देश्य संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना और अधिक से अधिक लोगों को पार्टी से जोड़ना है। सदस्यता अभियान के माध्यम से पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने का प्रयास कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आयोजन केवल सदस्यता कार्यक्रम नहीं बल्कि सांसद इमरान मसूद की राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन भी माना जा रहा है। गागलहेड़ी क्षेत्र समाजवादी पार्टी विधायक आशु मलिक का क्षेत्र माना जाता है, ऐसे में यहां कांग्रेस का बड़ा कार्यक्रम आयोजित होना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि कार्यक्रम से पहले कांग्रेस संगठन में अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। सम्मेलन की तैयारियों को लेकर अलग-अलग नेताओं द्वारा अलग-अलग स्थानों पर बैठकें आयोजित किए जाने से संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं। जिला अध्यक्ष संदीप राणा ने जिला कार्यालय पर बैठक की, जबकि महानगर अध्यक्ष मनीष त्यागी ने महानगर कार्यालय में अलग बैठक आयोजित की। वहीं सांसद इमरान मसूद ने अपने आवास स्थित कार्यालय पर कार्यकर्ताओं के साथ रणनीतिक बैठक की।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि इन बैठकों में कई प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति साफ तौर पर संगठनात्मक मतभेदों की ओर इशारा कर रही है। जिला अध्यक्ष की बैठक में महानगर अध्यक्ष मौजूद नहीं रहे, जबकि महानगर की बैठक में जिला अध्यक्ष नजर नहीं आए। वहीं सांसद इमरान मसूद की बैठक में भी कई प्रमुख नेताओं की गैरमौजूदगी चर्चा का कारण बनी रही।
कांग्रेस के पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं के बीच भी नाराजगी की चर्चा सामने आ रही है। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे लोगों की अपेक्षा हाल ही में जुड़े नेताओं को अधिक महत्व दिया जा रहा है। इससे संगठन के भीतर असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है।
इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी में जुटा हुआ है। पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दे रहे हैं। शहर और देहात क्षेत्रों में पोस्टर, बैनर और जनसंपर्क अभियान के माध्यम से माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि गागलहेड़ी सम्मेलन कांग्रेस के लिए आगामी चुनावों से पहले बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है। यदि कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटती है और बड़े नेता पार्टी में शामिल होते हैं, तो इससे जिले की राजनीति में कांग्रेस को नई ऊर्जा मिल सकती है। वहीं यदि संगठनात्मक गुटबाजी खुलकर सामने आती है, तो विपक्षी दलों को कांग्रेस पर हमला बोलने का मौका भी मिल सकता है।
अब सबकी निगाहें 18 मई को होने वाले इस कार्यक्रम पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस आयोजन के जरिए जिले की राजनीति में कितना बड़ा संदेश देने में सफल होती है और सांसद इमरान मसूद पार्टी हाईकमान के सामने अपनी राजनीतिक पकड़ कितनी मजबूत साबित कर पाते हैं।








