शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। नगर निगम द्वारा सफाई कार्य निजी कंपनियों को सौंपे जाने के विरोध में सफाई कर्मचारियों का आंदोलन सोमवार से उग्र हो गया। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत सफाई कर्मचारियों ने नगर निगम के विभिन्न कार्यालयों, गैराज और संबंधित परिसरों में तालाबंदी कर दी तथा शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप कर दी। हड़ताल के पहले ही दिन महानगर के कई क्षेत्रों में कूड़े के ढेर लग गए और आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सफाई कर्मचारी संगठनों का कहना है कि नगर निगम द्वारा वर्षों से संचालित सफाई व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही थी और कर्मचारी भी वर्तमान व्यवस्था से संतुष्ट थे। इसके बावजूद सफाई कार्य निजी कंपनियों को सौंपने का निर्णय कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है। कर्मचारियों ने इसे उनके अधिकारों और रोजगार सुरक्षा पर सीधा हमला बताया।
सोमवार सुबह से ही नगर निगम परिसर में बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी एकत्रित होने लगे थे। कर्मचारियों ने निगम कार्यालयों में ताले लगाकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया और बाद में धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों की भारी भीड़ और आक्रोश को देखकर निगम प्रशासन के अधिकारी भी स्थिति को लेकर चिंतित नजर आए।
गौरतलब है कि इससे पहले सफाई कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों की महापौर डॉ. अजय सिंह तथा नगर निगम अधिकारियों के साथ वार्ता हुई थी। हालांकि इस बैठक में कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया था। वार्ता विफल रहने के बाद कर्मचारियों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी थी।
धरने पर मौजूद कर्मचारी नेताओं ने कहा कि नगर निगम सफाई व्यवस्था को निजी हाथों में देकर कर्मचारियों का शोषण करना चाहता है। उनका आरोप है कि निजी कंपनियों के आने से स्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित होंगे तथा भविष्य में रोजगार असुरक्षित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम को पहले कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए, न कि निजीकरण को बढ़ावा देना चाहिए।
सफाई कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक नगर निगम निजी कंपनियों को दिया गया सफाई कार्य वापस नहीं लेता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कर्मचारियों ने कहा कि वे किसी भी कीमत पर निजीकरण को स्वीकार नहीं करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
हड़ताल का असर सोमवार को शहर के कई इलाकों में साफ दिखाई दिया। बाजारों, मुख्य मार्गों और मोहल्लों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे नजर आए। नियमित सफाई न होने के कारण लोगों को बदबू और गंदगी की समस्या का सामना करना पड़ा। कई क्षेत्रों में नालियों की सफाई भी नहीं हो सकी, जिससे स्थानीय नागरिकों में नाराजगी दिखाई दी।
आम लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। गर्मी के मौसम में सफाई व्यवस्था बाधित होने से बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। नागरिकों ने नगर निगम प्रशासन और कर्मचारी संगठनों से जल्द वार्ता कर समाधान निकालने की अपील की है।
धरना-प्रदर्शन में विनोद घावरी, सोनी आजाद, राहुल वाल्मीकि, ए. गफ्फार, महेंद्र बेदी, सुनील घाघट, राकेश, कमल किशोर चंचल, राजकुमार, गुरुदयाल सिंह, तौसीफ, ईश्वर, हिमांशु, रतन लाल, उदय महरून, राजकुमार चंदेल, सिद्धांत, संजय, अमित कुमार, मुनेश कुमार, दीपक, मांगेराम, भूरा आदिवाल, अमित, अविनाश बिरला, आशू, शिवम, सचिन और संदीप सहित बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी मौजूद रहे।
नगर निगम और सफाई कर्मचारी संगठनों के बीच जारी यह विवाद अब शहर की सफाई व्यवस्था और आम जनजीवन पर सीधा असर डालने लगा है। ऐसे में लोगों की निगाहें अब प्रशासन और कर्मचारी नेताओं के बीच होने वाली अगली वार्ता पर टिकी हुई हैं।








