शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। नगर निगम की सफाई व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ के तत्वावधान में चल रहा विशाल धरना-प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। सफाई कर्मचारियों और सुपरवाइजरों की लगातार हड़ताल के चलते शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगने से आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि भीषण गर्मी में फैल रही दुर्गंध ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
नगर निगम परिसर में चल रहे धरने में मंगलवार को भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज के राष्ट्रीय संचालक वीरोतम अजय बिरला अपने सहयोगियों केंद्रीय सदस्य वीर श्रेष्ठ प्रवीण सोदाई, प्रदेश अध्यक्ष गौरव पुहाल, मंडल अध्यक्ष वीर आनंद बिरला और जिला अध्यक्ष गौरव चौहान सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारियों के साथ पहुंचे। उन्होंने आंदोलनरत सफाई कर्मचारियों को समर्थन देते हुए कहा कि भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज सफाई कर्मियों के अधिकारों की लड़ाई में पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ा है।
धरने में मौजूद सफाई कर्मचारियों ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल वापस लेने की मांग उठाई। कर्मचारियों का कहना है कि नगर निगम में वर्षों से कार्यरत ठेका और संविदा सफाई कर्मचारियों को स्थायी किया जाए तथा उनका वेतन बढ़ाया जाए। आंदोलनकारियों ने साफ चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
तीन दिनों से जारी हड़ताल का असर अब पूरे शहर में साफ दिखाई देने लगा है। शहर के प्रमुख बाजारों, मोहल्लों और मुख्य मार्गों पर कूड़े के ढेर जमा हो गए हैं। नेहरू मार्केट, दवाई मार्केट, मोबाइल मार्केट और कई अन्य व्यस्त इलाकों में गंदगी का अंबार लग गया है। दुकानदारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है।
धरना दे रहे कर्मचारियों ने नगर निगम गैरेज पर तालाबंदी कर विरोध प्रदर्शन किया और कई विभागों में कामकाज भी बंद करा दिया। यूनियन नेताओं ने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो ईद के मौके पर भी सफाई व्यवस्था पूरी तरह बंद रखी जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी।
उधर नगर निगम महापौर डॉ. अजय कुमार और यूनियन पदाधिकारियों के बीच वार्ता का दौर लगातार जारी है, लेकिन अब तक किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी है। यूनियन नेताओं का कहना है कि निजीकरण की प्रक्रिया वापस लेने और कर्मचारियों की मांगें माने जाने तक आंदोलन जारी रहेगा।
शहर में बिगड़ती सफाई व्यवस्था को लेकर आम जनता में भी नाराजगी बढ़ने लगी है। लोगों का कहना है कि स्मार्ट सिटी का दावा करने वाले शहर में यदि लगातार तीन दिन तक कूड़ा नहीं उठेगा तो इससे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। सामाजिक संगठनों ने भी प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की है ताकि आमजन को राहत मिल सके।
धरना स्थल पर मौजूद कर्मचारियों ने कहा कि सफाई कर्मी शहर को स्वच्छ रखने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन निजीकरण की नीति से उनके रोजगार और भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि निजीकरण के नाम पर वर्षों से काम कर रहे कर्मियों के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है।
अब शहरवासियों की निगाहें नगर निगम प्रशासन और यूनियन के बीच होने वाली अगली वार्ता पर टिकी हुई हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में शहर की सफाई व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है।








