शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। नगर निगम सहारनपुर में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति निजी कंपनियों के माध्यम से किए जाने के प्रस्ताव को लेकर विरोध तेज हो गया है। इसी क्रम में आदि धर्म समाज (आधस) भारत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर ठेका प्रथा समाप्त करने और सफाई कर्मचारियों के हितों की रक्षा की मांग उठाई। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
आदि धर्म समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि नगर निगम में सफाई कर्मचारियों की भर्ती निजी कंपनियों के माध्यम से कराने से कर्मचारियों का शोषण बढ़ेगा और उनके रोजगार की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। संगठन का कहना है कि वर्षों से कार्यरत सफाई कर्मचारियों को ठेका व्यवस्था में डालना उनके साथ अन्याय होगा।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने नगर निगम परिसर में पिछले कई दिनों से चल रहे सफाई कर्मचारियों के धरना-प्रदर्शन को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। पदाधिकारियों ने कहा कि सफाई कर्मचारी नगर की स्वच्छता व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनके हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
संगठन ने सरकार से मांग की कि सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति सीधे नगर निगम के माध्यम से की जाए तथा निजी कंपनियों को यह कार्य न सौंपा जाए। साथ ही लंबे समय से कार्य कर रहे कर्मचारियों को नियमित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग भी की गई।
आदि धर्म समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि विभिन्न न्यायालयों द्वारा समय-समय पर दिए गए आदेशों में भी लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने और उन्हें नियमित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। इसके बावजूद यदि ठेका प्रथा लागू की जाती है तो इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ेगा।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि सफाई कर्मचारियों को पर्याप्त वेतन, सुरक्षा उपकरण और सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलना चाहिए। संगठन का आरोप है कि निजी कंपनियों के माध्यम से नियुक्ति होने पर कर्मचारियों को इन सुविधाओं से वंचित होना पड़ सकता है।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि नगर निगम प्रशासन को कर्मचारियों और संगठनों से वार्ता कर ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे कर्मचारियों के हित सुरक्षित रह सकें। उन्होंने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर सफाई कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग की।
ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के कई पदाधिकारी और समर्थक मौजूद रहे। इस पूरे मामले को लेकर नगर निगम और सफाई कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद ने अब सामाजिक संगठनों का भी ध्यान आकर्षित करना शुरू कर दिया है।








