मनोज मिड्ढा
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में जहां कांग्रेस लंबे समय से अपने संगठन को मजबूत करने की चुनौती से जूझ रही है, वहीं सहारनपुर जनपद पार्टी के लिए एक अलग राजनीतिक प्रयोगशाला के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है। लोकसभा चुनाव 2024 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इमरान मसूद की जीत के बाद जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है और अब विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
सहारनपुर की राजनीति में इन दिनों सबसे अधिक चर्चा कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की रणनीति को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सहारनपुर की सातों सीटों पर अपनी दावेदारी मजबूत करना चाहती है। हालांकि समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावनाएं भी लगातार बनी हुई हैं, लेकिन इमरान मसूद का आक्रामक रुख सहयोगी दलों के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर सकता है।
कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में जुटे इमरान मसूद
लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद इमरान मसूद लगातार जनसंपर्क अभियान और संगठन विस्तार में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में गागलहेड़ी में आयोजित सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में कई स्थानीय नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ली। इनमें पूर्व समाजवादी पार्टी मंत्री सरफराज खन पूर्व विधायक मसूद अख्तर सहित कई प्रभावशाली चेहरे शामिल रहे। इस कार्यक्रम में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे भी मौजूद रहे।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार मंच पर हुई हल्की राजनीतिक असहमति ने यह संकेत जरूर दे दिया कि कांग्रेस के स्थानीय और प्रदेश नेतृत्व की रणनीति में अंतर नजर आ रहा है। जहां प्रदेश नेतृत्व समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के तहत सीटों के तालमेल की बात कर रहा है, वहीं इमरान मसूद सहारनपुर की सभी सात विधानसभा सीटों पर कांग्रेस की दावेदारी मजबूत करने के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं।
सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीटों पर खींचतान संभव
राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो समाजवादी पार्टी पहले से ही सहारनपुर की कुछ सीटों पर मजबूत स्थिति में मानी जाती है। बेहट और सहारनपुर देहात सीट पर सपा के विधायक वर्तमान में सक्रिय हैं। ऐसे में यदि कांग्रेस सभी सीटों पर दावा करती है तो गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर टकराव की स्थिति बन सकती है।
सूत्रों की मानें तो समाजवादी पार्टी नेतृत्व ‘जीतने वाले उम्मीदवार’ की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में जिन सीटों पर सपा मजबूत स्थिति में है, वहां कांग्रेस को आसानी से जगह मिलने की संभावना कम मानी जा रही है। हालांकि कांग्रेस स्थानीय स्तर पर अपने संगठन और जनाधार को मजबूत कर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।
बसपा और अन्य दलों पर भी नजर
सहारनपुर की राजनीति हमेशा से बहुकोणीय रही है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, भाजपा और बसपा के बीच यहां मुकाबला दिलचस्प रहा है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व ने बसपा के साथ भी संभावित समीकरणों को लेकर संपर्क साधने की कोशिश की थी, लेकिन उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों को लेकर सहमति नहीं बनती, तो सहारनपुर में त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबले की संभावना बढ़ सकती है। इसका सीधा असर भाजपा की रणनीति पर भी पड़ सकता है।
इमरान मसूद की राजनीतिक पकड़ बनी चर्चा का विषय
सहारनपुर की राजनीति में इमरान मसूद को एक प्रभावशाली जनाधार वाले नेता के रूप में देखा जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस नेतृत्व उनकी रणनीति के अनुरूप टिकट वितरण नहीं करता, तो वे निर्दलीय या समर्थित उम्मीदवारों के जरिए भी समीकरण बदलने की क्षमता रखते हैं।
सहारनपुर की राजनीति में पहले भी ऐसे उदाहरण सामने आ चुके हैं जब स्थानीय समीकरणों ने बड़े दलों की रणनीति को प्रभावित किया हो। यही कारण है कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और भाजपा सभी दल सहारनपुर की राजनीतिक गतिविधियों पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
कांग्रेस संगठन में अंदरूनी असंतोष की चर्चा
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि कांग्रेस संगठन के कुछ पदाधिकारी स्थानीय स्तर पर अपनी अनदेखी से नाराज हैं। पार्टी के भीतर जिला और महानगर इकाइयों के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। कई कार्यकर्ता यह मानते हैं कि संगठनात्मक स्तर पर एकजुटता की जरूरत है ताकि विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।
हालांकि कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व लगातार यह दावा कर रहा है कि पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर मजबूती से तैयारी कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय का कहना है कि कांग्रेस युवाओं, पिछड़ों, दलितों और वंचित वर्गों को जोड़ने के लिए व्यापक अभियान चला रही है।
2027 की सियासत में सहारनपुर बना अहम केंद्र
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर की राजनीतिक स्थिति आगामी विधानसभा चुनाव में काफी अहम रहने वाली है। यहां के जातीय, सामाजिक और राजनीतिक समीकरण प्रदेश की बड़ी राजनीति को भी प्रभावित करते हैं।
फिलहाल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और भाजपा सभी अपने-अपने स्तर पर रणनीति बनाने में जुटे हैं। लेकिन यह तय माना जा रहा है कि 2027 के चुनाव से पहले सहारनपुर की राजनीति में अभी कई बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।








