शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। नगर निगम के वार्ड 46 में सड़क उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब भाजपा की अंदरूनी राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। भाजपा पार्षद ज्योति अग्रवाल प्रणामी और नगर विधायक राजीव गुंबर के बीच बढ़ी नाराजगी के पीछे अब पार्टी के कुछ नेताओं की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजनीतिक सूत्रों की मानें तो जिस वैश्य समाज के एक नेता को नगर विधायक राजीव गुंबर ने भाजपा में शामिल कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, आज वही नेता पर्दे के पीछे से विधायक के खिलाफ माहौल बनाने में जुटा हुआ है। भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि निजी राजनीतिक महत्वाकांक्षा और अपने हित साधने के लिए कुछ लोग संगठन के भीतर ही खींचतान पैदा कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि वार्ड 46 में हुए सड़क उद्घाटन कार्यक्रम में पार्षद ज्योति अग्रवाल को आमंत्रित नहीं किए जाने से विवाद की शुरुआत हुई। इसके बाद पार्षद ने अपनी नाराजगी जाहिर की और मामला धीरे-धीरे राजनीतिक रंग लेने लगा। हालांकि भाजपा के कई वरिष्ठ कार्यकर्ता इसे सामान्य प्रोटोकॉल से जुड़ा विषय मान रहे हैं, लेकिन कुछ नेताओं द्वारा इसे जातीय रंग देने की कोशिश की जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत सामाजिक समरसता और संगठनात्मक एकजुटता रही है। ऐसे में यदि व्यक्तिगत हितों के लिए समाजों के बीच दूरी पैदा करने की कोशिश की जाएगी तो इसका असर भविष्य की राजनीति पर पड़ सकता है। खासतौर पर पंजाबी और वैश्य समाज के बीच अनावश्यक विवाद खड़ा करना पार्टी के लिए नुकसानदायक माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार कुछ ऐसे नेता, जो पहले अन्य राजनीतिक दलों में सक्रिय रहे और बाद में भाजपा में शामिल हुए, अब संगठन के भीतर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए नए समीकरण बना रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कुछ नेताओं ने जांच एजेंसियों और राजनीतिक दबाव के चलते भाजपा का दामन थामा था, लेकिन अब वही लोग पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ माहौल बनाने में लगे हुए हैं।
भाजपा समर्थकों का कहना है कि विधायक राजीव गुंबर लगातार संगठन और जनता के बीच सक्रिय रहने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने विभिन्न समाजों को साथ लेकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया है। ऐसे में छोटे मुद्दों को अनावश्यक रूप से बड़ा बनाकर उनकी छवि खराब करने का प्रयास जनता के बीच अच्छा संदेश नहीं दे रहा।
फिलहाल यह मामला सहारनपुर भाजपा की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि संगठन नेतृत्व इस बढ़ती नाराजगी और अंदरूनी खींचतान को किस तरह संभालता है।








