सहारनपुर कांग्रेस में बढ़ी गुटबाजी, 2027 चुनाव से पहले चुनौती

सहारनपुर कांग्रेस में गुटबाजी तेज, इमरान मसूद की सक्रियता के बीच जिला और महानगर संगठन की दूरियां 2027 चुनाव से पहले चर्चा में।

 

मनोज मिड्ढा

सहारनपुर। लोकसभा चुनाव 2024 में जीत के बाद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद लगातार सहारनपुर में संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में जुटे हुए हैं। जनसभाओं, प्रेस वार्ताओं और संगठनात्मक बैठकों के जरिए वह कांग्रेस को दोबारा जमीनी स्तर पर मजबूती देने का प्रयास कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने बड़ा राजनीतिक संदेश देते हुए यह घोषणा भी की कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में उनके परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा। राजनीतिक गलियारों में इसे परिवारवाद से दूरी और कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

लेकिन दूसरी ओर कांग्रेस के भीतर बढ़ती गुटबाजी अब खुलकर सामने आने लगी है। जिला और महानगर संगठन के बीच बढ़ती दूरियां पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई हैं। एक तरफ जहां इमरान मसूद लगातार संगठन को विस्तार देने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर महानगर नेतृत्व की दूरी पार्टी के भीतर असहज माहौल का संकेत दे रही है।

हाल ही में आयोजित कांग्रेस की एक प्रेस वार्ता ने इन चर्चाओं को और तेज कर दिया। इस कार्यक्रम में जिले के लगभग सभी वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी मौजूद दिखाई दिए, लेकिन महानगर अध्यक्ष मनीष त्यागी और उनकी टीम पूरी तरह अनुपस्थित रही। इस गैरमौजूदगी ने संगठन के भीतर चल रही खींचतान को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए। कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा शुरू हो गई कि आखिर ऐसा कौन सा विवाद है जिसकी वजह से महानगर संगठन लगातार दूरी बनाए हुए है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस के भीतर मतभेद सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए हों। इससे पहले 9 मई को गागलहेड़ी में आयोजित कांग्रेस सम्मेलन में भी प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी के दौरान मंच पर इमरान मसूद और महानगर नेतृत्व के बीच बहस होने की चर्चाएं सामने आई थीं। उस दौरान मंच पर दिखाई दी असहजता ने साफ संकेत दे दिया था कि जिला और महानगर संगठन के बीच सबकुछ सामान्य नहीं चल रहा। हालांकि किसी भी नेता ने सार्वजनिक रूप से विवाद को स्वीकार नहीं किया, लेकिन कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा लगातार बनी हुई है।

कांग्रेस के कई कार्यक्रमों में महानगर अध्यक्ष की गैरमौजूदगी अब सवाल खड़े कर रही है। इतना ही नहीं, शहर में लगाए जाने वाले कांग्रेस के बड़े पोस्टरों और होर्डिंग्स में भी कई बार महानगर अध्यक्ष की तस्वीर नजर नहीं आती। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे संगठन के भीतर समन्वय की कमी का संदेश जाता है। पार्टी के पुराने कार्यकर्ता इसे केवल व्यक्तिगत मतभेद नहीं बल्कि संगठनात्मक असंतुलन के रूप में देख रहे हैं।

इधर सांसद इमरान मसूद लगातार कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि कांग्रेस को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाएगा और मेहनती कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने का काम होगा। परिवार के किसी सदस्य को चुनाव न लड़ाने की घोषणा कर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि कांग्रेस अब केवल परिवार आधारित राजनीति नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं के बल पर आगे बढ़ेगी।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार इमरान मसूद की रणनीति संगठन को नया स्वरूप देने की दिखाई दे रही है। वह युवाओं को जोड़ने, पुराने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जमीनी स्तर पर कांग्रेस की मौजूदगी मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। लेकिन यदि महानगर और जिला संगठन के बीच की खाई समय रहते नहीं पटी, तो इसका असर 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर पड़ सकता है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को लेकर भी अब सवाल उठने लगे हैं। पूर्व विधायक सुरेंद्र कपिल और पूर्व अध्यक्ष महेंद्र तनेजा जैसे वरिष्ठ नेताओं को संगठन में संतुलन बनाने वाला चेहरा माना जाता है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि ये वरिष्ठ नेता सक्रिय पहल करें और दोनों पक्षों को साथ बैठाकर बातचीत कराएं, तो संगठन के भीतर बनी दूरियों को काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि भाजपा जैसे मजबूत संगठन का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस को पहले अपने घर की नाराजगी दूर करनी होगी। सहारनपुर में कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक आज भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। मुस्लिम, दलित और परंपरागत कांग्रेस समर्थक वर्ग अब भी पार्टी से उम्मीद लगाए बैठा है, लेकिन लगातार बढ़ती गुटबाजी पार्टी की सबसे बड़ी कमजोरी बनती जा रही है।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा भी आम है कि यदि संगठन एकजुट होकर काम करे तो 2027 के चुनाव में पार्टी बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि व्यक्तिगत नाराजगी और गुटबाजी को समाप्त कर एक मंच पर आने का प्रयास किया जाए। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि जनता के बीच मजबूत संदेश तभी जाएगा जब पार्टी के बड़े नेता और संगठनात्मक पदाधिकारी एक साथ दिखाई देंगे।

शहर की राजनीति पर नजर रखने वाले लोगों का कहना है कि वर्तमान समय में सहारनपुर कांग्रेस दो अलग-अलग तस्वीरों में दिखाई दे रही है। एक तरफ इमरान मसूद लगातार सक्रियता दिखाकर संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को आगे लाने और परिवारवाद से दूरी का संदेश देने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर महानगर नेतृत्व की दूरी पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष की कहानी बयान कर रही है।

अब सभी की निगाहें कांग्रेस नेतृत्व पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या पार्टी समय रहते इन अंदरूनी मतभेदों को खत्म कर पाएगी या फिर यह गुटबाजी आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए नई मुश्किलें खड़ी करेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पार्टी ने जल्द संगठनात्मक एकता पर ध्यान नहीं दिया तो भाजपा और अन्य दल इसका राजनीतिक लाभ उठाने में पीछे नहीं रहेंगे।

फिलहाल सहारनपुर कांग्रेस में सबसे बड़ी चर्चा यही है कि क्या जिला और महानगर संगठन की दूरियां खत्म होंगी या फिर यह खींचतान आने वाले समय में और ज्यादा खुलकर सामने आएगी।

 

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