शहरी चौपाल ब्यूरो
गंगोह। हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर प्रेस क्लब गंगोह द्वारा गणेश शंकर विद्यार्थी चौक पर स्थापित महान स्वतंत्रता सेनानी, समाजसेवी और निर्भीक पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर पत्रकारों और गणमान्य नागरिकों ने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए पत्रकारिता को जनहित, राष्ट्रहित और सामाजिक सरोकारों से जोड़कर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रेस क्लब गंगोह के अध्यक्ष अफजल खान ने कहा कि बदलते समय और डिजिटल क्रांति के दौर में भी प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता बरकरार है। समाचार पत्र आज भी समाज के लिए प्रमाणिक और तथ्यपरक सूचना का प्रमुख माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को निष्पक्षता, ईमानदारी और जनहित की भावना के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।
वरिष्ठ पत्रकार बलबीर सिंह तोमर ने कहा कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं बल्कि समाज और लोकतंत्र की सेवा का मिशन है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का अत्यधिक व्यवसायीकरण लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय है। पत्रकारों को सत्य और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समाज को सही दिशा देने का कार्य करना चाहिए। उन्होंने हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में समाचार पत्रों की भूमिका को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
पत्रकार श्रवण शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने देश के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज डिजिटल युग में सूचना का प्रवाह बेहद तेज हो गया है, लेकिन पत्रकारों की जिम्मेदारी भी पहले से अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाओं के दौर में सत्यापित और निष्पक्ष समाचारों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। पत्रकारों को तकनीक के साथ कदम मिलाकर चलते हुए पत्रकारिता की गरिमा और विश्वसनीयता को बनाए रखना होगा।
पूर्व प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद टेबक ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता के जनक पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने वर्ष 1826 में ‘उदंत मार्तंड’ का प्रकाशन कर हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी थी। आज हिंदी पत्रकारिता दिवस पर हमें हिंदी भाषा और पत्रकारिता के प्रचार-प्रसार का संकल्प लेना चाहिए तथा नई पीढ़ी को इसके महत्व से अवगत कराना चाहिए।
कार्यक्रम में डॉ. राकेश गर्ग, राजेश्वर शर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और समाज को जागरूक बनाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। वर्तमान समय में पत्रकारों के सामने अनेक चुनौतियां हैं, लेकिन सत्य, निष्पक्षता और जनहित के प्रति समर्पण ही पत्रकारिता की वास्तविक पहचान है।
इस अवसर पर सुरेंद्र अरोड़ा, भारत गर्ग, रमेश गर्ग, सुहैल खान, नौशाद चौधरी, उमंग गर्ग, रोहित, तीरथ, अमरीश, भूपेंद्र सहित बड़ी संख्या में पत्रकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास को आगे बढ़ाने तथा पत्रकारिता के आदर्शों और मूल्यों की रक्षा के संकल्प के साथ हुआ।








