शहरी चौपाल ब्यूरो
सहारनपुर। नगर निगम द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन को लेकर शाकुंभरी सभागार में जनपद स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन, कचरा पृथक्करण, पुनर्चक्रण और संसाधन पुनर्प्राप्ति सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यशाला में नगरायुक्त शिपू गिरि ने ऑनलाइन प्रतिभाग करते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि नया ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026, वर्ष 2016 के नियमों का संशोधित एवं उन्नत स्वरूप है। इसका उद्देश्य शहरों और कस्बों में बढ़ते कचरे का वैज्ञानिक, पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ प्रबंधन सुनिश्चित करना है, जिससे स्वच्छ और स्वस्थ शहरी वातावरण का निर्माण हो सके।
नगरायुक्त ने कहा कि नए नियमों को लेकर किसी प्रकार की आशंका या भ्रम की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नियमों के उद्देश्यों को भली-भांति समझते हुए गंभीरता के साथ उनका अनुपालन सुनिश्चित करें। साथ ही जनजागरूकता अभियान चलाकर आम नागरिकों को भी कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूक किया जाए।
अपर नगरायुक्त मृत्युंजय ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि नए नियमों में सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा को विशेष महत्व दिया गया है। यह व्यवस्था प्रकृति के उस सिद्धांत पर आधारित है जिसमें किसी भी संसाधन को बेकार नहीं माना जाता। उन्होंने कहा कि कचरे को फेंकने के बजाय उसके पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और संसाधन पुनर्प्राप्ति पर जोर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक नागरिक, संस्थान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान का दायित्व है कि वह कचरे का चार श्रेणियों—गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा और विशेष देखभाल वाले कचरे—में पृथक्करण सुनिश्चित करे। इससे रिसाइक्लिंग और वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और आसान बन सकेगी।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. योगेंद्र कुमार ने कहा कि नए नियमों का प्रमुख लक्ष्य लैंडफिल साइटों पर निर्भरता कम करना है। उन्होंने कहा कि अधिकतम कचरे का पुनर्चक्रण सुनिश्चित कर डंपिंग ग्राउंड में जाने वाले कचरे की मात्रा को न्यूनतम करना आवश्यक है। उन्होंने बल्क वेस्ट जनरेटरों की पहचान कर उन्हें ईबीडब्ल्यूजीआर पोर्टल पर पंजीकृत कराने तथा स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया।
कार्यशाला में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, कम्पोस्टिंग, बायोगैस उत्पादन, वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं और नगर निकायों के समक्ष आने वाली व्यवहारिक चुनौतियों एवं उनके समाधान पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी दी गई।
इस अवसर पर अपर नगरायुक्त मृत्युंजय, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रवीण शाह, विभिन्न नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारी, मंडी समितियों के सचिव, सीपीपीआरआई, स्टार पेपर मिल तथा अन्य संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यशाला का उद्देश्य जनपद में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों और संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करना तथा स्वच्छ, हरित और टिकाऊ शहरी विकास की दिशा में ठोस कदम उठाना रहा।








